आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । नगर पंचायत चोपन में करीब 77.47 लाख रुपये के विकास कार्यों की निविदा प्रक्रिया से पहले ही काम कराए जाने का मामला अब प्रशासनिक जांच तक पहुंच गया है। इस मामले को लेकर मीडिया में खबरें प्रकाशित होने के बाद जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने प्रकरण का संज्ञान लिया है। जिलाधिकारी ने एडीएम (वित्त एवं राजस्व) को पूरे मामले की जांच सौंपते हुए रिपोर्ट तलब की है। साथ ही संबंधित कार्यों के भुगतान की प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई है। डीएम ने जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही है।
नगर पंचायत चोपन की ओर से 24 सितंबर 2026 को नौ विकास कार्यों के लिए अल्पकालीन निविदा प्रकाशित की गई थी। इन कार्यों की अनुमानित लागत करीब ₹77.47 लाख बताई गई है। निविदा दस्तावेज प्राप्त करने की अंतिम तिथि 8 अक्टूबर तथा निविदा जमा करने की अंतिम तिथि 9 अक्टूबर निर्धारित की गई थी। यानी निविदा प्रक्रिया अपने निर्धारित चरण में थी, लेकिन इसी बीच यह मामला सामने आया कि निविदा में शामिल करीब सात कार्य पहले ही मौके पर कराए जा चुके हैं।
टेंडर पूरा होने से पहले काम, अब जांच में खुलेगा राज –
मीडिया में प्रकाशित खबरों में इस पूरे मामले को प्रमुखता से उठाया गया था। खबरों के बाद जिलाधिकारी के स्तर से संज्ञान लिए जाने से नगर पंचायत में हड़कंप की स्थिति है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब नौ विकास कार्यों के लिए निविदा प्रक्रिया चल रही थी और निविदा जमा करने की अंतिम तिथि 9 अक्टूबर निर्धारित थी, तो उससे पहले ही करीब सात कार्य धरातल पर कैसे करा दिए गए? यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है कि निविदा प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही कार्य करा दिए गए थे, तो यह भी जांच का विषय होगा कि काम शुरू कराने के लिए किस स्तर से निर्देश दिए गए और संबंधित कार्य किसकी देखरेख में कराए गए।
पहले काम, बाद में टेंडर के खुलासे ने बढ़ाई बेचैन –
नगर पंचायत चोपन के विकास कार्यों से जुड़ा यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि इसमें निविदा प्रक्रिया और मौके पर कराए गए कार्यों के बीच समय-क्रम को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। सवाल यह भी है कि यदि कार्य पहले ही करा दिए गए थे तो बाद में उन्हीं कार्यों के लिए निविदा निकालने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या संबंधित ठेकेदार या कार्यदायी संस्था को निविदा पूरी होने से पहले ही कार्य कराने की अनुमति दी गई थी? क्या कार्यों के लिए कोई पूर्व स्वीकृति अथवा कार्यादेश जारी हुआ था? इन सभी बिंदुओं की जांच अब एडीएम वित्त की रिपोर्ट में सामने आने की उम्मीद है।
टेंडर फाइल से लेकर माप पुस्तिका तक होगी जांच –
पूरे मामले में निविदा फाइल, कार्यादेश, माप पुस्तिका, कार्य शुरू होने की वास्तविक तिथि, मौके पर कार्य की स्थिति, संबंधित ठेकेदार और भुगतान से जुड़े अभिलेखों की जांच महत्वपूर्ण होगी। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कार्य कब शुरू हुए और निविदा प्रक्रिया के किस चरण में उन्हें कराया गया।
मामले में स्थानीय स्तर पर भी तरह-तरह की चर्चाएं हैं, लेकिन जब तक प्रशासनिक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी अधिकारी, ठेकेदार या कार्यदायी संस्था की भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
भुगतान पर रोक, दोषी मिले तो होगी कार्यवाही –
मीडिया में मामला सामने आने के बाद जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। एडीएम वित्त एवं राजस्व को पूरे प्रकरण की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है साथ ही संबंधित कार्यों के भुगतान पर रोक लगा दी गई है। जिलाधिकारी ने कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाएगी।
“बहरहाल योगी सरकार भले ही जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने और भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कार्रवाई का दावा करती हो, लेकिन जिले के कुछ विभागों में इसका भय कितना है, यह नगर पंचायत चोपन का मामला बयां करता नजर आ रहा है। निविदा प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही विकास कार्य कराए जाने के आरोप ने सरकारी कामकाज की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि जब टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही कार्य धरातल पर उतर गए तो आखिर इसकी जिम्मेदारी किसकी है और नियमों की अनदेखी हुई तो किस स्तर पर हुई? अब मामले में जिलाधिकारी के निर्देश पर एडीएम वित्त एवं राजस्व की जांच शुरू हो चुकी है। अब देखने वाली बात होगी कि जांच में क्या कुछ निकलकर सामने आता है और जिम्मेदारी तय होने के बाद प्रशासन की कार्यवाही किस दिशा में आगे बढ़ती है।”






