आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । जंगल, जलाशय और नदियों से समृद्ध सोनभद्र में अब जलीय और वन्यजीवों की आवाजाही नदियों, जलाशयों और जंगल की सीमाओं से निकलकर सड़कों और आबादी के करीब तक पहुंचती नजर आ रही है। जुगैल क्षेत्र से सामने आया सड़क पर मगरमच्छ का वायरल वीडियो इसी बढ़ते खतरे की तस्वीर पेश कर रहा है। सड़क के बीचों-बीच पड़ा मगरमच्छ और उसके बेहद करीब से गुजरते दोपहिया व चार पहिया वाहन यह बताने के लिए काफी हैं कि स्थिति कितनी संवेदनशील हो सकती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल वन विभाग की त्वरित निगरानी और रेस्क्यू व्यवस्था को लेकर खड़ा हो रहा है।
हालांकि नवहिंद समाचार वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता, लेकिन वीडियो में दिखाई दे रहा दृश्य राहगीरों के साथ-साथ वन्यजीव की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करता है। सड़क पर अचानक मगरमच्छ आ जाने से वाहन चालक के सामने कुछ ही सेकेंड में अप्रत्याशित स्थिति पैदा हो सकती है। खासकर बाइक सवार के लिए उससे बचना मुश्किल हो सकता है, जबकि तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आने से मगरमच्छ की जान भी जा सकती है।
सड़क पर पहुंचा मगरमच्छ, जिम्मेदारी किसकी –
स्थानीय लोगों के मुताबिक, बारिश और जलस्तर में बदलाव के बाद जिले के कई इलाकों में मगरमच्छों की आवाजाही बढ़ी है। यदि ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में मगरमच्छ लगातार आबादी और सड़कों के आसपास दिखाई दे रहे हैं तो क्या वन विभाग ने इन स्थानों को चिह्नित कर निगरानी बढ़ाई है? क्या लोगों को सतर्क करने के लिए कोई प्रभावी सूचना तंत्र बनाया गया है? और सबसे अहम सवाल यह है कि मगरमच्छ के सड़क पर पहुंचने की सूचना मिलने पर विभाग की टीम कितनी जल्दी मौके पर पहुंचती है?
इन सवालों का जवाब इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि मामला सिर्फ मानव सुरक्षा का नहीं है। सड़क पर भटकता मगरमच्छ खुद भी दुर्घटना का शिकार हो सकता है। ऐसे में समय रहते रेस्क्यू न होने की स्थिति में एक तरफ इंसानी जान जोखिम में होगी तो दूसरी तरफ वन्यजीव संरक्षण का उद्देश्य भी प्रभावित होगा।
घटना के बाद कार्यवाही की नहीं बल्कि पहले तैयारी की जरूरत –
वन्यजीवों की आबादी वाले क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका हमेशा बनी रहती है। ऐसे में विभाग की भूमिका सिर्फ सूचना मिलने के बाद रेस्क्यू तक सीमित नहीं रह सकती। संवेदनशील जलाशयों और मार्गों की पहचान, नियमित निगरानी, स्थानीय लोगों को जागरूक करना और आपात स्थिति में तत्काल रेस्क्यू टीम की उपलब्धता जैसी व्यवस्थाएं जरूरी हैं।
स्थानीय लोगों ने वन विभाग से मांग की है कि जुगैल, घोरावल, चोपन समेत उन क्षेत्रों में विशेष निगरानी अभियान चलाया जाए, जहां मगरमच्छों की मौजूदगी की सूचना मिल रही है साथ ही सड़क किनारे ऐसे स्थानों को चिह्नित कर वाहन चालकों को भी सतर्क किया जाए।
“बहरहाल वायरल वीडियो की सत्यता की स्वतंत्र पुष्टि भले न हुई हो, लेकिन इसमें दिखाई दे रहा खतरा नजरअंदाज करने लायक नहीं है। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि वन एवं वन्यजीव विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार करेगा या उससे पहले ही संवेदनशील इलाकों में निगरानी और रेस्क्यू व्यवस्था को सक्रिय करेगा?”





