आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया रोकने, गलत तरीके से मतदाता सूची से हटाए गए लोगों का मताधिकार बहाल करने तथा चुनाव आयोग की साख बहाल करने की मांग को लेकर वाम दलों ने शनिवार को आवाज बुलंद की। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और भाकपा (माले) के नेताओं ने जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को संबोधित चार सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा।
माकपा के जिला मंत्री का0 नन्दलाल आर्य और भाकपा (माले) के का0 राजदेव सिंह ने कहा कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने तथा पुनः नाम जोड़ने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक व्यवस्था सुनिश्चित किया जाना जरूरी है। नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची से किसी भी पात्र व्यक्ति का नाम गलत तरीके से हटाया जाना उसके लोकतांत्रिक अधिकारों को प्रभावित करता है।
वाम दलों ने ज्ञापन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने, SIR की प्रक्रिया पर रोक लगाने और गलत तरीके से मतदाता सूची से बाहर किए गए सभी लोगों के नाम बहाल करने की मांग की। इसके साथ ही चुनाव आयोग की स्वतंत्र एवं लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली बहाल करने की मांग भी उठाई गई।
ज्ञापन में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की वर्तमान व्यवस्था में बदलाव कर प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल करते हुए चयन समिति के माध्यम से नियुक्ति व्यवस्था लागू करने की मांग की गई। नेताओं ने कहा कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
आंदोलन में का0 प्रेमनाथ जिला संयोजक किसान सभा, हनुमान प्रसाद, राजबली, रवीन्द्र कुमार, अनंत प्रसाद, सुभाषचंद्र, चंद्रशेखर, रामबचन और दीपक कुमार सहित बड़ी संख्या में वाम दलों के कार्यकर्ता मौजूद रहे।





