राजस्व विभाग ने जीवित रामप्रसाद को कागजों में मारा, 4 साल बाद कोर्ट के आदेश से हुए ‘जिंदा

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उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले की बल्दीराय तहसील से सरकारी सिस्टम की एक ऐसी लापरवाही सामने आई है, जिसने पूरे महकमे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां राजस्व रिकॉर्ड की एक बड़ी चूक के कारण एक जीवित व्यक्ति राम प्रसाद को सरकारी फाइलों में मृत घोषित कर दिया गया था। अपनी ही मौत के इस झूठे सरकारी ठप्पे के खिलाफ राम प्रसाद को पूरे चार साल तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। आखिरकार, तहसीलदार की अदालत के एक आदेश के बाद राम प्रसाद को प्रशासनिक कागजों में फिर से ‘जिंदा’ होने का हक मिल सका है। यह पूरा मामला सरकारी दफ्तरों में बैठे कर्मचारियों की मनमानी और फाइलों को बिना जांचे-परखे बंद करने की लापरवाही को उजागर करता है।

यह अजीबोगरीब मामला ग्राम गौहनिया मजरे हलियापुर की कृषि भूमि के उत्तराधिकार (वरासत) विवाद से जुड़ा हुआ है। इस जमीन को लेकर देव आनंद और राम प्रसाद पक्ष के बीच लंबे समय से कानूनी जंग चल रही थी। इसी दौरान अपीलकर्ता देव आनंद ने मृतक की पहचान को लेकर एक भ्रम पैदा करने की कोशिश की थी। इस भ्रम के जाल में फंसकर वर्ष 2021 में तत्कालीन राजस्व निरीक्षक राम समुझ ने एक बेहद गलत आदेश पारित कर दिया। उन्होंने बिना जमीनी हकीकत जाने राम प्रसाद और एक अन्य व्यक्ति शिवपल्टन को एक ही व्यक्ति मान लिया। चूंकि शिवपल्टन की मृत्यु हो चुकी थी, इसलिए राजस्व निरीक्षक के इस एक गलत फैसले से राम प्रसाद भी सरकारी कागजों में हमेशा के लिए ‘मृत’ दर्ज हो गए। इस बड़ी चूक का सीधा असर राम प्रसाद की पैतृक जमीन पर पड़ा और उनका अपनी ही भूमि से दावा कमजोर होने लगा।

राजस्व विभाग की फाइलों में यह ‘मौत’ पूरे चार साल तक दर्ज रही, लेकिन इस दौरान किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने मौके पर जाकर सच्चाई जानने की जहमत नहीं उठाई। जबकि ग्रामीणों के बयानों में साफ तौर पर यह बात सामने आ चुकी थी कि राम प्रसाद और शिवपल्टन दो अलग-अलग व्यक्ति हैं। वरासत के इस खेल में अपनी जमीन और खुद के वजूद को बचाने के लिए पीड़ित ने तहसीलदार अरविंद तिवारी की अदालत का दरवाजा खटखटाया। तहसीलदार अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गवाहों, ग्रामीणों के बयानों, मृत्यु प्रमाण पत्रों और पुराने राजस्व अभिलेखों की गहराई से पड़ताल की। जांच में यह पूरी तरह साबित हो गया कि मरने वाला व्यक्ति शिवपल्टन था, जबकि राम प्रसाद पूरी तरह जीवित हैं। अदालत ने कड़ी नाराजगी जताते हुए 27 फरवरी 2021 के उस गलत आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है और राम प्रसाद का नाम खतौनी में फिर से दर्ज करने के सख्त निर्देश दिए हैं, जिसके बाद पीड़ित को बड़ी राहत मिली है।

AJEET KUMAR SINGH
Author: AJEET KUMAR SINGH

अजीत कुमार सिंह, नव हिंद समाचार (न्यूज़ एजेंसी) के उत्तर प्रदेश स्टेट हेड के रूप में कार्यरत्त हैं, जिनके पास पत्रकारिता का 2 साल का अनुभव है। अपनी तीव्र रिपोर्टिंग, रणनीतिक सोच और फील्ड वर्क में महारत के साथ, वह उत्तर प्रदेश में एजेंसी को प्रभावी ढंग से संभाल रहे हैं। अजीत जमीनी स्तर के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने और निष्पक्ष पत्रकारिता के माध्यम से समाज में बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"

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