देवदूत बनी चोपन पुलिस और यूपी-112 की टीम, फांसी के फंदे पर लटकी महिला को सीपीआर देकर दी नई जिंदगी

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सोनभद्र। जनपद में आमजन की सुरक्षा और आपातकालीन सहायता के लिए तत्पर सोनभद्र पुलिस का एक बेहद मानवीय और संवेदनशील चेहरा सामने आया है, जहां पुलिसकर्मियों की सूझबूझ और त्वरित कार्रवाई से एक महिला को मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया गया। पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा के निर्देशन में काम कर रही थाना चोपन पुलिस और यूपी-112 पीआरवी की टीम ने देवदूत की भूमिका निभाते हुए फांसी के फंदे पर लटकी एक महिला को न सिर्फ नीचे उतारा, बल्कि मौके पर ही सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) देकर उसकी थमी हुई सांसों को दोबारा लौटा दिया। पुलिस के इस साहसिक और जीवन रक्षक कार्य की पूरे इलाके में जमकर सराहना हो रही है।

घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार, थाना चोपन क्षेत्र के अंतर्गत नगर पंचायत के पास स्थित अम्मा टोला में अनिल कुमार अपनी पत्नी छोटी के साथ किराए के मकान में रहते हैं। शनिवार और रविवार की दरम्यानी रात पारिवारिक कलह के चलते विवाद इतना बढ़ गया कि गुस्से और अवसाद में आकर महिला ने खुद को कमरे के अंदर बंद कर लिया और आत्मघाती कदम उठाने का प्रयास करने लगी। घर के भीतर अनहोनी की आशंका को देखते हुए इसकी सूचना तत्काल यूपी-112 को दी गई। सूचना मिलते ही पीआरवी वाहन संख्या-1070 पर तैनात मुख्य आरक्षी नरेंद्र कुमार पटेल और आरक्षी सुनील कुमार गौड़ बिना एक पल गंवाए बेहद तत्परता के साथ मौके पर पहुंच गए।

जब पुलिस टीम मौके पर पहुंची और खिड़की से भीतर झांका, तो महिला पंखे के सहारे साड़ी का फंदा बनाकर आत्महत्या की तैयारी करती हुई दिखाई दी। पुलिसकर्मियों ने सूझबूझ का परिचय देते हुए खिड़की से ही महिला को आवाज देकर काफी समझाने और शांत करने का प्रयास किया, लेकिन गुस्से में अंधी हो चुकी महिला ने उनकी एक न सुनी और फंदे से लटक गई। स्थिति को अत्यंत नाजुक और गंभीर देखते हुए पुलिस जवानों ने तत्काल साहस दिखाया और कमरे की खिड़की को पूरी ताकत से तोड़कर भीतर प्रवेश कर गए। उन्होंने तेजी से महिला को फंदे से नीचे उतारा, लेकिन तब तक महिला की सांसें पूरी तरह थम चुकी थीं और शरीर में कोई हलचल नहीं थी।

ऐसी आपातकालीन स्थिति में अस्पताल ले जाने तक का समय भी नहीं था, लिहाजा पुलिस के जवानों ने बिना समय गंवाए मौके पर ही महिला को तत्काल सीपीआर देना शुरू किया। पुलिसकर्मियों द्वारा लगातार दी गई चेस्ट कंप्रेशन और कृत्रिम सांसों के चमत्कारिक असर से कुछ ही देर में महिला के शरीर में हरकत हुई और उसकी सांसें पुनः चलने लगीं। इसके तुरंत बाद पुलिस टीम ने महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चोपन पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि अगर पुलिसकर्मियों ने मौके पर समय रहते सटीक तरीके से सीपीआर न दिया होता, तो महिला को बचाना नामुमकिन था। वर्तमान में महिला की स्थिति पूरी तरह सुरक्षित और सामान्य बताई जा रही है। चोपन पुलिस और पीआरवी टीम की इस त्वरित कार्रवाई, संवेदनशीलता और अद्वितीय मानवीय कार्यशैली की स्थानीय नागरिकों और पीड़ित परिजनों द्वारा भूरि-भूरि प्रशंसा की जा रही है।

Vinod Garg
Author: Vinod Garg

2 years experience in the field of journalism.

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