अनुदेशकों के मानदेय वृद्धि पर जिला प्रशासन ने आयोजित किया भव्य सम्मान समारोह, कलेक्ट्रेट में वितरित किया गया चेक 

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  •  अनुदेशकों मानदेय बढ़कर हुआ 17,000, कलेक्ट्रेट में वितरित किया गया चेक

सोनभद्र। जनपद के कलेक्ट्रेट सभागार में उच्च प्राथमिक शिक्षा की रीढ़ कहे जाने वाले अंशकालिक अनुदेशकों के लिए सम्मान का एक नया अध्याय लिखा गया। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के कुल 24,517 अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में की गई ऐतिहासिक वृद्धि के क्रम में जिला प्रशासन एवं बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा एक भव्य सम्मान समारोह एवं मानदेय वितरण शुभारंभ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस निर्णय से अकेले जनपद सोनभद्र के 460 कार्यरत अनुदेशकों को सीधे तौर पर बढ़े हुए मानदेय का लाभ मिलना आरम्भ हो गया है। कार्यक्रम के दौरान यह तथ्य भी रेखांकित किया गया कि बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत उच्च प्राथमिक विद्यालयों की कक्षाओं में 100 या उससे अधिक छात्र नामांकन होने पर ही अनुदेशकों का पद सृजित होता है, जहाँ नियमानुसार अधिकतम तीन अनुदेशकों की नियुक्ति का प्रावधान है। ये अनुदेशक खेल, कला, गृहशिल्प और कार्यानुभव जैसे विषयों के विशेषज्ञ हैं, जो बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पूर्व में कुल 41,000 अनुदेशकों के सापेक्ष अब प्रदेश में केवल 24,296 अनुदेशक ही शेष रह गए हैं, ऐसे में इस संवर्ग की सेवा सुरक्षा और आर्थिक सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।

समारोह के दौरान राज्य स्तर (लखनऊ) पर आयोजित मुख्य कार्यक्रम का सजीव प्रसारण कलेक्ट्रेट सभागार में बड़ी स्क्रीन पर किया गया, जिसे उपस्थित समस्त अनुदेशकों ने बेहद उत्साह के साथ देखा। जैसे ही लखनऊ से प्रदेश के समस्त अनुदेशकों के कल्याण और मानदेय वृद्धि की आधिकारिक घोषणा की गई, पूरा कलेक्ट्रेट परिसर अनुदेशकों की करतल ध्वनि और खुशी से गूंज उठा। इस गरिमामयी अवसर पर जनपद के उत्कृष्ट कार्य करने वाले अनुदेशकों को मंच पर आमंत्रित कर मुख्य अतिथि व विशिष्ट अतिथियों द्वारा अंगवस्त्र और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। समारोह का मुख्य आकर्षण अनुदेशकों को अप्रैल माह के बढ़े हुए मानदेय के रूप में 17,000 रुपये का प्रतीकात्मक चेक वितरित करना रहा, जिसे पाकर सोनभद्र के अनुदेशकों के चेहरे खिल उठे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि समाज कल्याण राज्य मंत्री संजीव सिंह गौड़ ने दीप प्रज्वलित कर समारोह की शुरुआत की। उन्होंने अनुदेशकों के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि हमारे यशस्वी मुख्यमंत्री संत भाव से प्रदेश के विकास और मानदेय कर्मियों के कल्याण की सौगात देते हैं। हमारे अनुदेशक साथी पूरी निष्ठा के साथ नियमित रूप से विद्यालय में रहकर शिक्षा व्यवस्था में अपना अमूल्य योगदान देते हैं। समाज की मुख्य धारा से अंतिम पायदान के समस्त बच्चों को निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की राह में उनका यह समर्पण अतुलनीय है। इसी को देखते हुए सरकार ने सभी कार्यरत शिक्षकों व कर्मियों को 5 लाख रुपये का मुफ्त स्वास्थ्य बीमा देने और मानदेय को बढ़ाकर 17,000 रुपये करने का यह ऐतिहासिक कदम उठाया है।

इस ऐतिहासिक अवसर पर अनुदेशक वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष रविंद्र बहादुर सिंह द्वारा मानदेय को 17,000 रुपये करने के इस कल्याणकारी निर्णय के लिए मुख्यमंत्री के प्रति विशेष रूप से आभार व्यक्त किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार के इस कदम से प्रदेश के हजारों अनुदेशक परिवारों में आर्थिक संबल और सम्मान की नई किरण जागी है। समारोह को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने अनुदेशकों और शिक्षकों को प्रेरित करते हुए कहा कि बच्चे हमेशा अपने शिक्षकों के व्यवहार का अनुकरण करते हैं और उन्हें देखकर ही अपना व्यक्तित्व ढालते हैं, इसलिए सभी शिक्षक और अनुदेशक बच्चों को मूल्य आधारित शिक्षा दें। शिक्षण कार्य के दौरान बच्चों की रुचि, उनकी क्षमता और उनके सीखने के स्तर (लर्निंग लेवल) का विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि हर बच्चे का प्रभावी और सकारात्मक विकास हो सके। इस दौरान सदर विधायक भूपेश चौबे ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अनुदेशक साथियों को इस नई शुरुआत के लिए हार्दिक बधाई दी। अनुदेशकों को उनके बड़े दायित्वों के प्रति प्रेरित करते हुए सदर विधायक ने कहा कि आप सभी पर कृषि, खेल और कला के क्षेत्रों में छात्रों की प्रतिभा को निखारने की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। आप सभी विद्यालय स्तर पर सड़क सुरक्षा, ‘प्लास्टिक मेरी जिम्मेदारी’, स्वच्छता और जल संकर्षण (वॉटर हार्वेस्टिंग) जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण सामाजिक विषयों पर चर्चा करके बच्चों के भीतर एक सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन ला सकते हैं। आपकी दी हुई यह सीख राष्ट्र निर्माण में बड़ी भूमिका निभाएगी।

कार्यक्रम में उपस्थित अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग के उपाध्यक्ष जीत सिंह, विशिष्ट अतिथि जिलाध्यक्ष भाजपा नन्द लाल गुप्ता और घोरावल विधायक प्रतिनिधि सुरेंद्र मौर्य ने भी सरकार की इस जनहितैषी और शिक्षक-हितैषी योजना की सराहना की। उन्होंने कहा कि 17,000 रुपये की यह सम्मानजनक राशि अनुदेशक साथियों के सामाजिक और आर्थिक सम्मान को और सुदृढ़ करेगी तथा इससे उनका मनोबल और ऊंचा होगा। इस गरिमामयी अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे और कार्यक्रम के अंत में आए हुए सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर विभिन्न अनुदेशक व शिक्षक संगठनों के पदाधिकारी, भारी संख्या में जनपद के अनुदेशक और विभागीय कर्मचारी उपस्थित रहे।

Vinod Garg
Author: Vinod Garg

2 years experience in the field of journalism.

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