बीएचयू में नारद मुनि के संचार दर्शन पर राष्ट्रीय संगोष्ठी: आधुनिक पत्रकारिता को मिली प्राचीन मूल्यों की नई दिशा

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वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा शनिवार को ‘देवर्षि नारद और भारतीय संचार परंपरा : अतीत से वर्तमान तक’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महामना मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसके बाद अतिथियों का स्वागत श्रीमद्भगवद्गीता भेंट कर किया गया। मुख्य अतिथि एवं श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विश्वभूषण मिश्र ने अपने संबोधन में देवर्षि नारद को सत्य, ज्ञान और संवाद का वैश्विक प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि नारद जी केवल एक संदेशवाहक नहीं थे, बल्कि वे समाज के भ्रम को दूर कर लोककल्याण का मार्ग प्रशस्त करने वाले आदर्श संचारक थे। महाभारत और रामायण के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने नारद मुनि को पत्रकारिता का अद्भुत प्रणेता स्वीकार किया।

संगोष्ठी के दौरान भारतीय जनसंचार की जड़ों और हिंदी पत्रकारिता के गौरवशाली इतिहास पर भी गहन मंथन हुआ। विशिष्ट वक्ता एवं काशी नागरी प्रचारिणी सभा के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल ने ‘उदन्त मार्तण्ड’ से लेकर भारतेंदु हरिश्चंद्र और राजा शिव प्रसाद ‘सितारे हिंद’ के योगदान को याद करते हुए पत्रकारिता को अभिव्यक्ति और संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाने वाली कला बताया। वहीं, कला संकाय प्रमुख प्रो. सुषमा घिल्डियाल ने छात्रों को निष्पक्ष और जिम्मेदार पत्रकार बनने की प्रेरणा देते हुए कहा कि पत्रकारिता समाज की सोच को दिशा देने का सबसे सशक्त माध्यम है। इस बौद्धिक विमर्श में यूनाइटेड भारत के संपादक भाष्कर द्विवेदी, प्रो. भुवाल राम और प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे सहित कई विद्वानों ने सत्य और धर्म आधारित संचार की महत्ता पर बल दिया।

इस राष्ट्रीय संगोष्ठी की विशेष उपलब्धि यह रही कि इसमें देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए प्रतिभागियों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से कुल 113 शोध पत्र प्रस्तुत किए, जो भारतीय संचार परंपरा की वर्तमान प्रासंगिकता को रेखांकित करते हैं। प्रो. ज्ञान प्रकाश मिश्र के स्वागत भाषण और डॉ. बाला लखेंद्र के कुशल संचालन में संपन्न हुए इस कार्यक्रम में प्रो. शोभना नार्लीकर, डॉ. नेहा पाण्डेय और डॉ. मनीष गुप्ता सहित भारी संख्या में शोध छात्र व गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। वक्ताओं ने सामूहिक रूप से इस बात को स्वीकार किया कि यदि आज की आधुनिक पत्रकारिता को सार्थक बनाना है, तो उसे अपनी जड़ों से जुड़कर देवर्षि नारद के सत्यनिष्ठा और लोककल्याणकारी सिद्धांतों को अपनाना होगा। यह संगोष्ठी न केवल एक शैक्षणिक आयोजन रही, बल्कि इसने भावी पत्रकारों के लिए नैतिकता और जिम्मेदारी का एक नया रोडमैप तैयार किया।

Vinod Garg
Author: Vinod Garg

2 years experience in the field of journalism.

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