वाराणसी: धर्म की नगरी काशी के गंगा घाटों पर स्नान के दौरान होने वाले हादसों को रोकने के लिए जल पुलिस ने एक बड़ी सुरक्षा योजना को धरातल पर उतारा है। पिछले चार वर्षों में गंगा में डूबने से हुई 152 मौतों के आंकड़े को देखते हुए प्रशासन ने 19 खतरनाक घाटों को चिह्नित कर वहां फ्लोटिंग बैरिकेडिंग और सेफ्टी नेट (सुरक्षा जाल) लगाने का निर्णय लिया है। वर्तमान में अस्सी, दशाश्वमेध और केदार घाट समेत कुल 11 प्रमुख घाटों पर यह जाल और बैरिकेडिंग स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि शेष 7 घाटों पर कार्य अंतिम चरण में है। मई से जुलाई के बीच गंगा में डूबने की घटनाओं में होने वाली बढ़ोत्तरी को देखते हुए यह कदम पर्यटकों और स्थानीय श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
जल पुलिस की इस व्यापक योजना के तहत न केवल पानी के भीतर जाल बिछाए जा रहे हैं, बल्कि घाटों की निगरानी के लिए नौ वॉच टावर और आठ फ्लोटिंग जेटी भी तैयार की जा रही हैं। एसीपी जल पुलिस अतुल अंजान त्रिपाठी के अनुसार, नमो घाट से लेकर रविदास घाट तक के नौ किलोमीटर के दायरे में सुरक्षा घेरा मजबूत किया जा रहा है। इसमें तुलसी घाट, मीर घाट, सिंधिया घाट और राजघाट जैसे संवेदनशील स्थलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके अलावा, डोमरी गांव के सामने बने नए खतरनाक स्पॉट पर भी चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। वर्ष 2022 से 2025 के बीच लगातार सामने आ रही हृदयविदारक घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए अब साइनेज और आधुनिक उपकरणों का सहारा लिया जा रहा है, ताकि देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालु भयमुक्त होकर गंगा स्नान का पुण्य लाभ ले सकें।
Author: AJEET KUMAR SINGH
अजीत कुमार सिंह, नव हिंद समाचार (न्यूज़ एजेंसी) के उत्तर प्रदेश स्टेट हेड के रूप में कार्यरत्त हैं, जिनके पास पत्रकारिता का 2 साल का अनुभव है। अपनी तीव्र रिपोर्टिंग, रणनीतिक सोच और फील्ड वर्क में महारत के साथ, वह उत्तर प्रदेश में एजेंसी को प्रभावी ढंग से संभाल रहे हैं। अजीत जमीनी स्तर के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने और निष्पक्ष पत्रकारिता के माध्यम से समाज में बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"





