लखनऊ हाईकोर्ट का कड़ा रुख: टेंडर प्रक्रिया में मनमानी पर लगी रोक, बीज विकास निगम के फैसले पर जताई नाराजगी

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लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने टेंडर प्रक्रिया में अधिकारियों द्वारा अपनाए गए मनमाने और पक्षपातपूर्ण रवैये के खिलाफ एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए पूरी प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने मेसर्स एसोसिएटेड जूट इंडस्ट्रीज की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता द्वारा सभी जरूरी दस्तावेज जमा करने के बावजूद उसकी बिड (बोली) को खारिज करना न केवल मनमाना है, बल्कि यह भेदभावपूर्ण प्रक्रिया का प्रमाण है।

मामला उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम लिमिटेड द्वारा हाई डेंसिटी (एंटी-स्किड) पॉली एथिलीन बोरे और सर्कुलर लूम पर बुने हुए बैग की आपूर्ति के लिए निकाले गए टेंडर से जुड़ा है। याचिकाकर्ता का तर्क था कि उसने टेंडर की सभी अनिवार्य शर्तों और दस्तावेजों के साथ अपनी बिड जमा की थी। इसके साथ ही, पूर्व में किए गए कार्यों के परचेज ऑर्डर और सफलतापूर्वक कार्य पूर्ण करने के सर्टिफिकेट भी संलग्न किए गए थे, जो यह साबित करते हैं कि फर्म के पास इस कार्य को पूरा करने की तकनीकी विशेषज्ञता मौजूद है। इसके बावजूद, निगम के अधिकारियों ने यह आधार बनाकर बिड को खारिज कर दिया कि याचिकाकर्ता ने परचेज ऑर्डर और कंप्लीशन सर्टिफिकेट अपलोड नहीं किए हैं।

याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि न केवल उसकी बिड को मनमाने तरीके से बाहर किया गया, बल्कि उसके द्वारा प्रस्तुत किए गए आवेदनों को भी दरकिनार कर दिया गया। आरोप है कि यह पूरी कवायद किसी विशिष्ट पक्ष को अनुचित लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से की गई थी। याची ने इस बात पर भी जोर दिया कि रविवार के दिन ही फाइनेंशियल बिड खोल दी गई, जो प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलीलों और तथ्यों पर गौर करते हुए माना कि निर्णय लेने की पूरी प्रक्रिया पक्षपात से दूषित है। इस गंभीर अनियमितता को देखते हुए अदालत ने टेंडर के तहत किसी भी प्रकार का नया कॉन्ट्रैक्ट देने पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही, कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया है कि वह उन दो प्रतिभागियों को मामले में पक्षकार बनाए जिन्हें अलग-अलग साइज के बैग्स के लिए एल-1 (सबसे कम बोली लगाने वाला) घोषित किया गया है। कोर्ट ने प्रतिवादी के वकील को यह पता लगाने का निर्देश दिया है कि क्या याचिकाकर्ता को वर्तमान चरण में टेंडर प्रक्रिया में पुनः शामिल करना संभव है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 14 मई को निर्धारित की गई है।

AJEET KUMAR SINGH
Author: AJEET KUMAR SINGH

अजीत कुमार सिंह, नव हिंद समाचार (न्यूज़ एजेंसी) के उत्तर प्रदेश स्टेट हेड के रूप में कार्यरत्त हैं, जिनके पास पत्रकारिता का 3 साल का अनुभव है। अपनी तीव्र रिपोर्टिंग, रणनीतिक सोच और फील्ड वर्क में महारत के साथ, वह उत्तर प्रदेश में एजेंसी को प्रभावी ढंग से संभाल रहे हैं। अजीत जमीनी स्तर के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने और निष्पक्ष पत्रकारिता के माध्यम से समाज में बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"

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