मौन रहकर किया गंगा स्नान…फिर दान, काशी के 84 घाटों पर उमड़े लाखों लोग

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Varanasi: मौनी अमावस्या पर्व पर गंगा तटों पर आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। भोर से ही नमो घाट, राजघाट, प्रह्लाद घाट, गाय घाट, त्रिलोचन घाट, ब्रह्मा घाट और पंचगंगा घाट पर श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया। हजारों की संख्या में भक्तों ने पूरे दिन गंगा स्नान कर मौन व्रत के साथ विधि-विधान से पूजन, दर्शन और दान किया। घाटों पर हर-हर गंगे के जयकारों के बीच धार्मिक वातावरण बना रहा।

मान्यता है कि गंगोत्री से गंगासागर तक गंगा की यात्रा में काशी में मां गंगा का प्रवाह पश्चिम दिशा की ओर है, इसी कारण इसे ‘पश्चिम वाहिनी गंगा’ कहा जाता है। मौनी अमावस्या के दिन मौन रहकर स्नान और दर्शन-पूजन करने की प्राचीन परंपरा के निर्वहन के लिए पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से श्रद्धालु एक दिन पूर्व से ही वाराणसी पहुंचने लगे थे। स्नान-पूजन के बाद श्रद्धालुओं ने काशी विश्वनाथ मंदिर, काल भैरव मंदिर, संकचट मोचन मंदिर सहित काशी के प्रमुख देवालयों में दर्शन किया।

सभी सिद्धियों का मूल मौन ही है। मां गंगा हमारे शरीर, आत्मा और मन तीनों को मिलाने का माध्यम बनेंगी। यही मौनी अमावस्या का मूल है। दरअसल, मकर राशि जीव के शरीर का प्रतीक है, सूर्य आत्मा का और चंद्रमा मन का प्रतीक। इन तीनों का एक साथ योग ही मौनी अमावस्या है। यह अपने आत्म-साक्षात्कार का पर्व है।

मानव शरीर में तीन तरह के मल हैं, जिन्हें साफ किया जाता है- कर्म, भाव और अज्ञान का मल। इनका नाश गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम में मौनी अमावस्या के दिन केवल स्नान मात्र से हो जाता है। लेकिन लोग अपनी प्रकृति से बंधे हैं और फिर उसी स्वभाव के अनुसार कर्म करते हैं। बीएचयू के ज्योतिष विभाग में शोध कर चुके डॉ. अधोक्षज पांडेय ने ये जानकारियां दी।

केवल शरीर को जल में डुबोना ही स्नान नहीं

डॉ. पांडेय ने कहा कि माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या इसलिए कहा गया है क्योंकि इस दिन मौन-स्नान को सिद्धिदायक माना गया है। केवल शरीर को जल में डुबोना ही स्नान नहीं है; वास्तविक स्नान तो वाक्-संयम है। मन से वाणी उत्पन्न होती है। मौन के माध्यम से प्राणशक्ति का संरक्षण होता है और अन्तःकरण शुद्ध होता है। अनियंत्रित वाणी अनावश्यक शब्दों के माध्यम से प्राणशक्ति का क्षय करती है। इसलिए शास्त्रों ने मौन को व्रत का स्वरूप दिया है। मौनी अमावस्या के दिन त्रिवेणी स्नान का फल सौ अश्वमेध यज्ञ और हजार राजसूय यज्ञ के समान होता है।

 

व्रत, दान, तप से श्री हरि उतने खुश नहीं होते जितने कि मौनी अमावस्या के स्नान से

व्रत, दान और तपस्या से भी भगवान श्रीहरि को उतनी प्रसन्नता नहीं होती, जितनी कि मौनी अमावस्या में स्नान मात्र से होती है। सभी पापों से मुक्ति और भगवान वासुदेव का प्रेम पाने के लिए हर व्यक्ति को इस दिन स्नान करना चाहिए। इस दिन की विशेषता यह है कि जहां कहीं भी जल हो, वह गंगाजल के समान ही होता है।

 

फिर भी प्रयाग, काशी, नैमिषारण्य, कुरुक्षेत्र, हरिद्वार तथा अन्य पवित्र तीर्थों और नदियों में स्नान का बड़ा महत्व है। बीएचयू के ज्योतिषाचार्य प्रो. विनय पांडेय ने बताया कि यह जानकारी शास्त्रसम्मत है। प्रो. विनय पांडेय के अनुसार, माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या मौनी अमावस्या शनिवार रात 11 बजकर 38 मिनट से प्रारंभ हो चुकी है और रविवार को रात 12 बजकर 57 मिनट तक रहेगी।

 

आज सुबह 355 मिनट का उत्तम मुहूर्त, मौन रहकर 5 लाख लोग करेंगे स्नान-दान

आज मौनी अमावस्या पर काशी में पांच लाख से ज्यादा श्रद्धालु गंगा स्नान करेंगे। सुबह 5:59 बजे से सुबह 11:55 बजे तक 355 मिनट का उत्तम मुहूर्त होगा। दशाश्वमेध, अस्सी, तुलसी, पंचगंगा, राजघाट, दरभंगा समेत सभी घाटों पर स्नानार्थी मौन व्रत रख गंगा स्नान, तिल-दान, वस्त्र-दान, अन्न-दान और ब्राह्मण सेवा कर अक्षय पुण्य प्राप्त करेंगे। रविवार को साल का एकमात्र दिन होगा जब भगवान सूर्य और चंद्रमा मकर राशि में एक साथ स्थित आएंगे।

 

योगियों, तपस्वियों, संत-महात्माओं और गृहस्थों के लिए इसे काफी बेहतर माना गया है। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति और ज्योतिषाचार्य प्रो. बिहारी लाल शर्मा कहते हैं कि आज मौनी अमावस्या पर किए गए ज्ञान, दान, स्नान तथा धार्मिक अनुष्ठान कई मायनों में विशेष होंगे। 25 घंटे 18 मिनट का कुल मुहूर्त और अमृत स्नान के लिए 8:30 घंटे मिलेंगे। शास्त्रीय प्रमाण के अनुसार 18 जनवरी को पूरे दिन मौनी अमावस्या के पुण्य कर्म सम्पन्न किए जा सकते हैं। वहीं आज सुबह 5:59 बजे से सुबह 11:55 बजे तक का मुहूर्त उत्तम होगा।

 

दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग भी बना है

कुलपति प्रो. शर्मा ने बताया कि इस अमावस्या का प्रभाव 19 जनवरी को सूर्योदय के बाद दो घटी (48 मिनट), यानी कि सुबह 7:28 बजे तक बना रहेगा। इस अवधि में भी स्नान, दान और जप आदि कर्म विशेष फलप्रद होंगे। इस वर्ष मौनी अमावस्या पर एक दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग भी है। शाम 4:41 से रात 9:23 बजे तक ‘हर्षण योग’ में स्नान, दान, जप और आध्यात्मिक साधना काफी पुण्यवर्धक है।

 

गोदौलिया-चौक के बीच भीषण जाम, पैदल चलना भी मुश्किल, गलियों में भी फंसे लोग

गोदौलिया से चौक के बीच शनिवार की शाम अचानक जाम से पूरा क्षेत्र चोक हो गया। हाल यह रहा कि पैदल चलना भी मुश्किल हो गया। मौनी अमावस्या की पूर्व संध्या पर यातायात दबाव बढ़ने के बावजूद नो व्हीकल जोन का पालन नहीं हुआ। दोपहिया वाहन और पैदल रिक्शा दौड़ते रहे। सड़क पर जाम के कारण गलियां भी चोक हो गईं। दशाश्वमेध और चौक पुलिस की लचर व्यवस्था से श्रद्धालु और राहगीर भी कराहते रहे। सड़कों पर बुजुर्ग और महिलाओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

 

दोपहर बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में दर्शन पूजन के दौरान गाड़ियों को रोका गया। मुख्यमंत्री के जाने के बाद सभी गाड़ियों की आवाजाही शुरू हो गई। अचानक इससे भीड़ बढ़ी और फिर मौनी अमावस्या की पूर्व संध्या पर दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं की संख्या ने भी दबाव बढ़ा दिया। हर तरफ जाम ही जाम रहा। सड़क पर बाइक, स्कूटी, पैडल रिक्शा के साथ-साथ पैदल राहगीर भी जाम में फंस गए।

जाम का असर चौक से सटे रेशम कटरा, ठठेरी बाजार, कचौड़ी गली, हकाक टोला और घुंघरानी गली में भी देखने को मिला। अपराह्न 3 बजे के बाद चौक-गोदौलिया मार्ग पर वाहनों की कतार लग गई। वहीं गलियों में भी जाम के कारण लोगों का पैदल चलना मुश्किल हो गया। स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।

Vinod Garg
Author: Vinod Garg

2 years experience in the field of journalism.

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