आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । ग्रामीण महिलाओं के हुनर को बाजार तक पहुंचाने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सोनभद्र में एक और पहल होने जा रही है। दीपावली के अवसर पर स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए चार नवंबर से राबर्ट्सगंज स्थित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) परिसर में तीन दिवसीय सरस मेले का आयोजन किया जाएगा। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से आयोजित इस मेले में महिलाओं के 40 स्टॉल लगाए जाएंगे। खास बात यह है कि मेले में पारंपरिक उत्पादों के साथ महिलाओं के हुनर से तैयार कई ऐसे उत्पाद भी देखने और खरीदने को मिलेंगे, जो लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेंगे।
मेले में बकरी के दूध के साबुन से श्रीअन्न के उत्पाद तक दिखेगी विविधता –
सरस मेले में स्थानीय हुनर और उत्पादों की विविधता देखने को मिलेगी। यहां सोन अर्थ ब्रांड के उत्पादों के साथ बकरी के दूध से तैयार साबुन, श्रीअन्न आधारित खाद्य सामग्री, फूलों की झालर, इलेक्ट्रॉनिक झालर, पंचगव्य से निर्मित लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, मिट्टी के दीपक, धूपबत्ती और बांस से बने आकर्षक उत्पादों के स्टॉल सजेंगे। दीपावली की खरीदारी के लिए पहुंचने वाले लोगों को स्थानीय महिलाओं के हाथों से तैयार उत्पाद खरीदने का अवसर मिलेगा। इससे जहां महिलाओं को सीधे बिक्री का मंच मिलेगा, वहीं स्थानीय उत्पादों को भी नई पहचान मिल सकेगी।
बिक्री के साथ नए ग्राहक जोड़ने पर रहेगा जोर –
एनआरएलएम के उपायुक्त रवींद्र वीर ने बताया कि “स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को केवल उत्पाद निर्माण तक सीमित रखने के बजाय उन्हें स्वरोजगार और बाजार से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सरस मेले के माध्यम से महिलाओं को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री का अवसर मिलेगा। साथ ही वे नए ग्राहकों से जुड़ सकेंगी और अपने उत्पादों की गुणवत्ता व उपयोगिता से लोगों को परिचित करा सकेंगी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण महिलाएं स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर विभिन्न प्रकार के गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार कर रही हैं। ऐसे आयोजनों से उनके उत्पादों को उचित बाजार और पहचान दिलाने में मदद मिलेगी।”
महिलाओं की आमदनी बढ़ने से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था –
सरस मेला केवल खरीद-बिक्री का मंच नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की उद्यमिता को आगे बढ़ाने का अवसर भी बनेगा। महिलाओं के उत्पादों को बाजार मिलने से उनकी आमदनी बढ़ेगी और स्वरोजगार की संभावनाएं मजबूत होंगी। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। दीपावली के त्योहार से पहले आयोजित यह मेला स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए कारोबार बढ़ाने और अपने उत्पादों को नई पहचान दिलाने का बेहतर अवसर साबित हो सकता है।
Author: Anand Kumar Chaubey
9 years experience in Journalism....





