लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों को धार देने के लिए बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने बड़े पैमाने पर सियासी जमीन तैयार करनी शुरू कर दी है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की तेज सुगबुगाहट है कि बसपा आगामी छह दिसंबर को संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर के परिनिर्वाण दिवस के अवसर पर राजधानी लखनऊ में एक ऐतिहासिक और देशव्यापी विशाल रैली का आयोजन कर सकती है, जिसके जरिए पार्टी चुनाव से ठीक पहले अपनी सियासी ताकत का बड़ा अहसास कराना चाहती है। हालांकि, इस मेगा रैली के आयोजन और रूपरेखा को लेकर अंतिम मुहर पार्टी सुप्रीमो और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती खुद लगाएंगी, लेकिन अंदरखाने चल रही तैयारियों के मुताबिक यदि कार्यक्रम तय होता है तो इस महारैली को बसपा प्रमुख मायावती के साथ-साथ पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद भी संयुक्त रूप से संबोधित कर सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस संभावित रैली के पीछे एक बड़ी वजह यह भी है कि आगामी 26 नवंबर को आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की राजधानी के रमाबाई आंबेडकर मैदान में देश भर के समर्थकों की भारी भीड़ जुटाने की योजना है, जिसके जवाब में बसपा भी अपने पारंपरिक कैडर को एकजुट कर अपनी ताकत का लोहा मनवाने की फिराक में है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, बसपा इस बार 20 लाख से अधिक समर्थकों और कार्यकर्ताओं को राजधानी में जुटाने का लक्ष्य लेकर चल रही है और इसी महारैली के मंच से पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव के आधिकारिक प्रचार अभियान का शंखनाद भी करेगी। इससे पहले गत नौ अक्तूबर को बसपा संस्थापक मान्यवर कांशीराम के परिनिर्वाण दिवस पर भी पार्टी की किसी बड़ी रैली के कयास लगाए जा रहे थे, तब बसपा सुप्रीमो ने केंद्रीय कार्यालय पर ही सादगी और श्रद्धा के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की थी, लेकिन अब दिसंबर में होने वाले इस आयोजन को लेकर राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है।
Author: NAV HIND SAMACHAR
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