आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । व्यवस्था में कमियां गिनाना और हर समस्या के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराना आसान है, लेकिन बदलाव की शुरुआत खुद से करना ही असली जिम्मेदारी है। इसी सोच को जमीन पर उतारते हुए नवरात्रि के पावन अवसर पर छपका निवासी युवाओं की एक टोली ने मारकुंडी स्थित संकट मोचन मंदिर की सूरत संवारने का बीड़ा उठाया। रंगरोगन के अभाव में जर्जर नजर आ रहे मंदिर की युवाओं ने रंगाई-पुताई कर उसे नया स्वरूप देने का प्रयास किया। युवाओं की इस पहल की चर्चा क्षेत्र में हो रही है।
नवरात्रि के दौरान मंदिरों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है। ऐसे में मारकुंडी स्थित संकट मोचन मंदिर की बदहाल दिख रही रंगत को सुधारने के लिए छपका निवासी अनिल, मनीष, सनी, जितेंद्र, नंदलाल, सुनील, आशीष सहित अन्य युवाओं ने खुद आगे आकर मंदिर का रंगरोगन किया। युवाओं ने अपने प्रयास से न केवल मंदिर की सुंदरता बढ़ाने का काम किया, बल्कि समाज के सामने सामूहिक सहभागिता और सामाजिक जिम्मेदारी की एक मिसाल भी पेश की।
इस दौरान युवाओं ने कहा कि हर व्यवस्था को ठीक करने के लिए सरकार को दोष देना उचित नहीं है। समाज में व्याप्त कमियों को दूर करने के लिए लोगों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। यदि प्रत्येक व्यक्ति किसी समस्या को लेकर केवल शिकायत करने के बजाय उसे दूर करने की दिशा में छोटा-सा प्रयास भी करे, तो बड़े बदलाव की राह आसान हो सकती है। उनका कहना था कि सार्वजनिक और धार्मिक स्थलों को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी केवल सरकारी तंत्र की नहीं, बल्कि आम नागरिकों की भी है।
Author: Anand Kumar Chaubey
9 years experience in Journalism....





