आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । आठ सूत्रीय लंबित मांगों के समाधान को लेकर उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ ने अब आर-पार की लड़ाई का फैसला कर लिया है। लंबित मांगों के समर्थन में आज से ऑनलाइन कार्यों का बहिष्कार शुरू करने के बाद संघ ने 17 अक्टूबर से प्रदेशव्यापी संपूर्ण कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी है। वहीं लेखपालों के इस निर्णय से तहसील स्तर पर राजस्व एवं ऑनलाइन सेवाओं से जुड़े कार्य प्रभावित होने की संभावना है।
जिलाध्यक्ष अमित शुक्ला ने कहा कि “लेखपाल लंबे समय से अपनी आठ सूत्रीय मांगों को लेकर शासन से समाधान की मांग कर रहे हैं, लेकिन मांगों पर अपेक्षित स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि संगठन ने चरणबद्ध तरीके से आंदोलन शुरू किया है। पहले चरण में ऑनलाइन कार्यों का बहिष्कार किया जा रहा है और यदि मांगों का समाधान नहीं हुआ तो 17 अक्टूबर से लेखपाल सभी प्रकार के सरकारी कार्यों का बहिष्कार करने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि लेखपाल राजस्व विभाग की जमीनी व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और लगातार जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। इसके बावजूद उनकी लंबित मांगों पर गंभीरता से निर्णय नहीं लिया जा रहा है। उन्होंने सरकार से मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील करते हुए कहा कि संगठन टकराव नहीं, बल्कि वार्ता के माध्यम से समाधान चाहता है। हालांकि मांगों की अनदेखी जारी रही तो प्रदेश संगठन के निर्णय के अनुसार आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।”
तहसील स्तर के कार्यों पर पड़ सकता है असर –
लेखपालों के संपूर्ण कार्य बहिष्कार की स्थिति में आय, जाति, निवास, राजस्व अभिलेखों से संबंधित कार्यों के साथ ही विभिन्न ऑनलाइन रिपोर्ट और तहसील स्तर के अन्य कार्य प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में 17 अक्टूबर की तारीख प्रशासन और लेखपाल संगठन के बीच आगे की रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
आंदोलन को लेकर सोनभद्र में भी लेखपाल लामबंद हैं। इस दौरान घोरावल तहसील अध्यक्ष गोपेन्द्र पाण्डेय, मंत्री अनूप यादव राहुल, रवि, आदित्य, अजय विक्रम, सुरेंद्र गुप्ता, संदीप, रविकांत, रंजीत, अर्पित, अनुराग, शीला, लक्ष्मी, सोनालिका और अल्का समेत अन्य लेखपाल उपस्थित रहे।
संघ ने स्पष्ट किया है कि मांगों पर ठोस पहल नहीं होने की स्थिति में 17 अक्टूबर से प्रदेशव्यापी संपूर्ण कार्य बहिष्कार किया जाएगा। अब देखना होगा कि आंदोलन की निर्धारित समयसीमा से पहले शासन स्तर पर कोई समाधान निकलता है या लेखपालों को अपनी मांगों के लिए आंदोलन को आगे बढ़ाना पड़ता है।






