चंद्रप्रभा सेंचुरी में दुधवा से लाई गई मादा गुलदार को जंगल में छोड़ा गया, अब दो नर और दो मादा गुलदारों से गुलजार हुआ अभयारण्य

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हर्षवर्धन केसरवानी 

 चन्दौली/सोनभद्र। चंद्रप्रभा वन्यजीव विहार के देव पहाड़ी स्थित घने जंगलों में मंगलवार को दुधवा टाइगर रिजर्व से रेस्क्यू कर लाई गई एक मादा गुलदार (तेंदुआ) को पूरी तरह सुरक्षित छोड़ दिया गया। इस नई मेहमान के आने के बाद अब चंद्रप्रभा सेंचुरी में कुल चार गुलदार हो गए हैं, जिनमें दो नर और दो मादा शामिल हैं। इससे पहले भी इस सेंचुरी में तीन गुलदारों को छोड़ा जा चुका है। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से सेंचुरी की जैव विविधता और वन्यजीवों की आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जो पर्यावरण के लिए एक बेहतरीन संकेत है।

प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) बी. शिव शंकर ने बताया कि इस मादा गुलदार को सभी वैज्ञानिक और तकनीकी मानकों के अनुरूप एक ऐसे विशिष्ट वन क्षेत्र में छोड़ा गया है, जहां उसके लिए पर्याप्त मात्रा में प्राकृतिक शिकार, पानी के प्राकृतिक स्रोत और सुरक्षित प्राकृतिक आवास उपलब्ध हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि सेंचुरी में छोड़े गए सभी गुलदारों की सुरक्षा और उनकी गतिविधियों पर वन विभाग की विशेष टीमें आधुनिक तकनीकों के माध्यम से लगातार चौबीसों घंटे पैनी नजर रख रही हैं। इसके साथ ही सेंचुरी से सटे हुए रिहायशी इलाकों और गांवों में सुरक्षा व्यवस्था को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत कर दिया गया है। डीएफओ ने स्थानीय ग्रामीणों से भावुक अपील करते हुए कहा कि वे बिना किसी बेहद जरूरी काम के जंगल के भीतर प्रवेश न करें और न ही किसी वन्यजीव को किसी भी तरह से परेशान करने या नुकसान पहुंचाने का प्रयास करें।

गुलदार की मौजूदगी को देखते हुए वन क्षेत्राधिकारी (रेंजर) अखिलेश दुबे अपनी पूरी टीम के साथ लगातार मुस्तैदी से जुटे हुए हैं और सेंचुरी के आसपास के गांवों में सघन जनजागरूकता अभियान चला रहे हैं। रेंजर अखिलेश दुबे ने ग्रामीणों को समझाते हुए कहा कि यदि किसी ग्रामीण इलाके या खेत-खलिहान के पास कभी गुलदार दिखाई दे, तो घबराने की बजाय संयम बरतें। उसके पीछे बिल्कुल न भागें, वहां भारी भीड़ न जुटाएं और न ही मोबाइल से उसका वीडियो बनाने या फोटो खींचने का जोखिम उठाएं, क्योंकि इससे वन्यजीव आक्रामक हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चंद्रप्रभा वन्यजीव विहार में गुलदारों का कुनबा बढ़ना हमारे पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) के लिए बेहद सकारात्मक है, लेकिन इसके साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष को शून्य पर रखना और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना वन विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी के तहत विभाग वन्यजीव संरक्षण और जन सुरक्षा दोनों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने का काम कर रहा है।

Vinod Garg
Author: Vinod Garg

2 years experience in the field of journalism.

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