राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी का बड़ा खुलासा: बिना पुलिस सत्यापन के रखे गए थे कर्मचारी, सुरक्षाकर्मी और कंट्रोल रूम प्रभारी भी जांच में पाए गए दोषी

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अयोध्या। देश के सबसे संवेदनशील और प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों में से एक अयोध्या के राम मंदिर में हुए करोड़ों रुपये के चढ़ावा चोरी मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी प्रारंभिक जांच में बेहद चौंकाने वाले और गंभीर खुलासे किए हैं। एसआईटी की विस्तृत जांच में सामने आया है कि मंदिर प्रबंधन ने वहां तैनात कर्मचारियों का अनिवार्य पुलिस सत्यापन (वेरिफिकेशन) तक नहीं कराया था, जो सीधे तौर पर रामलला की सुरक्षा व्यवस्था के साथ एक बड़ा खिलवाड़ है। सूत्रों के मुताबिक, मंदिर परिसर में वर्तमान में करीब 800 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें से लगभग 600 कर्मी ठेके (आउटसोर्सिंग) पर रखे गए हैं और करीब 200 कर्मचारियों को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सीधे नौकरी पर रखा है। जांच में यह बड़ी लापरवाही उजागर हुई है कि इनमें से अधिकांश कर्मियों की भर्ती किसी नियम-कायदे के तहत नहीं, बल्कि ट्रस्ट के पदाधिकारियों, उनके रिश्तेदारों और करीबियों की सिफारिश पर की गई थी। सिफारिश के बल पर बिना किसी जांच-पड़ताल के इन्हें सीधे काम पर रख लिया गया और वेतन भी मिलने लगा। इतना ही नहीं, पहले से भर्ती हुए लोग बाद में अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को भी मंदिर में नौकरी पर लगवाने के खेल में शामिल हो गए, जिससे सुरक्षा मानकों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया।

एसआईटी ने अपनी विस्तृत जांच में इस पूरे मामले के लिए करीब 40 लोगों को सीधे तौर पर दोषी पाया है। इन दोषियों में मंदिर के कंट्रोल रूम प्रभारी, वहां तैनात अन्य तकनीकी कर्मी और दान की गणना कक्ष (काउंटिंग रूम) के बाहर तैनात सुरक्षाकर्मी प्रमुख रूप से शामिल हैं। करोड़ों रुपये की इतनी बड़ी चोरी होने के बावजूद मंदिर के आंतरिक निगरानी तंत्र और सुरक्षा व्यवस्था में भारी शिथिलता पाई गई, जिसके बाद गणना कक्ष और उसके आसपास तैनात सभी कर्मियों की जिम्मेदारी तय की गई है। पुलिस अब इस मामले में निजी सुरक्षा एजेंसियों के गार्डों के साथ-साथ वहां मुस्तैद पुलिस और पीएसी (प्रादेशिक आर्म्स कांस्टेबुलरी) के जवानों की भूमिका की भी गहनता से जांच कर रही है। जांच एजेंसी का स्पष्ट कहना है कि यदि किसी भी सुरक्षाकर्मी या अधिकारी की आपराधिक संलिप्तता पाई जाती है, तो उनके खिलाफ कठोर कानूनी शिकंजा कसा जाएगा, जबकि कर्तव्य में लापरवाही बरतने वाले अन्य दोषियों के विरुद्ध विभागीय स्तर पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। एसआईटी ने इन सभी अहम तथ्यों को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में शामिल किया है, जिसके आधार पर अब स्थानीय पुलिस केस की आगे की विवेचना को आगे बढ़ाएगी।

चढ़ावा चोरी के इस हाईप्रोफाइल मामले में मंदिर ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों पर भी जांच की आंच पहुंच चुकी है। एसआईटी की प्राथमिक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को अभी तक क्लीन चिट नहीं मिली है। उनके साथ ही ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा और निर्माण समिति के सहायक गोपाल राव की भूमिका की भी विस्तृत जांच लगातार जारी है। एसआईटी इस बात का पता लगा रही है कि क्या इन शीर्ष पदाधिकारियों के स्तर पर भी कोई प्रशासनिक लापरवाही या चूक हुई थी, जिसका पूरा ब्यौरा आगामी विस्तृत जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया जाएगा। इस बड़ी चूक के बाद राम मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था में आमूल-चूल और बड़े बदलाव करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। एसआईटी की सिफारिशों के आधार पर मंदिर परिसर की सुरक्षा में तैनात दागी व लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से बदला जाएगा। साथ ही, भविष्य में ऐसी किसी भी घटना को रोकने और आंतरिक निगरानी तंत्र को अभेद्य बनाने के लिए एक नया व बेहद कड़ा मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार किया जा रहा है, ताकि देश की इस ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा पूरी तरह अचूक रहे।

Navhind Samachar
Author: Navhind Samachar

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