श्रम विभाग और एएचटीयू की संयुक्त टीम ने 4 बाल श्रमिकों को कराया मुक्त, नियोक्ताओं पर विधिक शिकंजा

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सोनभद्र। जनपद में बाल श्रम के समूल उन्मूलन और बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग द्वारा संयुक्त रूप से एक बड़ा विशेष अभियान चलाया गया। जिलाधिकारी चर्चित गौड़ एवं पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा के कड़े निर्देशन में सोमवार, 15 जून 2026 को श्रम विभाग और थाना मानव तस्करी रोधी इकाई (एएचटीयू) की संयुक्त टीम ने चोपन, ओबरा सहित जनपद के विभिन्न व्यापारिक प्रतिष्ठानों और कार्यस्थलों पर औचक छापेमारी करते हुए सघन चेकिंग अभियान चलाया। इस व्यापक कार्रवाई के दौरान टीम ने विभिन्न दुकानों और होटलों से काम कर रहे 4 नाबालिग बच्चों को चिन्हित कर उन्हें बाल श्रम के दलदल से सुरक्षित मुक्त कराया। इसके साथ ही, इन मासूम बच्चों से जबरन मजदूरी कराने वाले संबंधित नियोक्ताओं और प्रतिष्ठान स्वामियों के खिलाफ श्रम विभाग द्वारा सुसंगत धाराओं में कड़ी विधिक व वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

इस संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान अधिकारियों ने सभी दुकानदारों, व्यवसायियों और आम जनता को बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम के कड़े कानूनी प्रावधानों के प्रति विस्तार से जानकारी दी। टीम ने लोगों को सचेत करते हुए कहा कि 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से किसी भी प्रकार का श्रम कराना कानूनन संगीन अपराध है, जिसके लिए भारी जुर्माने और जेल का प्रावधान है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे बच्चों को काम पर रखने के बजाय उन्हें अनिवार्य रूप से शिक्षा से जोड़ें, ताकि उनका भविष्य संवर सके। इस महत्वपूर्ण और सफल रेस्क्यू टीम में श्रम विभाग की ओर से श्रम प्रवर्तन अधिकारी मनोज शर्मा और मोहम्मद रईश शामिल रहे, जबकि थाना मानव तस्करी रोधी इकाई (एएचटीयू) सोनभद्र की तरफ से निरीक्षक रामदरश राम, मुख्य आरक्षी धनंजय यादव, आरक्षी पंकज कुमार और महिला आरक्षी शालिनी वैश्य ने तत्परता से अपनी भूमिका निभाई। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बाल श्रम और मानव तस्करी की रोकथाम के लिए इस प्रकार का सघन चेकिंग अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा।

Harsh Vardhan
Author: Harsh Vardhan

9 years experience in the field of journalism.

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