विकास के नाम पर ‘सरकारी खजाने’ में सेंध: बलिया में दो पंचायत सचिवों और ग्राम प्रधान पर एफआईआर, बिना काम कराए डकार गए 15.55 लाख रुपये

SHARE:

बलिया। उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद अंतर्गत सीयर ब्लॉक की ग्राम पंचायत हल्दीरामपुर में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के कथित गबन और भारी वित्तीय अनियमितता का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत में विकास की गंगा बहाने के नाम पर स्वीकृत हुए लाखों रुपये के बजट को धरातल पर उतारे बिना ही कागजों पर ठिकाने लगा दिया गया। विभागीय जांच में भ्रष्टाचार और 15.55 लाख रुपये के अनियमित भुगतान की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। इसी कड़ी में उभांव थाने में तत्कालीन दो पंचायत सचिवों और वर्तमान ग्राम प्रधान के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया है, जिससे पूरे पंचायत विभाग और क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है और विवेचना की कमान उप निरीक्षक अरविंद कुमार सिंह को सौंपी गई है।

इस बड़े वित्तीय घोटाले का भंडाफोड़ तब हुआ जब सीयर ब्लॉक के सहायक विकास अधिकारी (एडीओ) पंचायत मनोज कुमार सिंह ने उभांव थाने में एक लिखित तहरीर दी। तहरीर के अनुसार, ग्राम पंचायत हल्दीरामपुर में रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी सेंटर) के निर्माण सहित कुल नौ अलग-अलग महत्वपूर्ण विकास कार्यों के लिए सरकारी धन की स्वीकृति दी गई थी। गांव में विकास कार्य न होने और धन के दुरुपयोग की गोपनीय शिकायत मिलने पर जिलाधिकारी के सख्त निर्देश पर मामले की त्रिस्तरीय गहन जांच कराई गई। जब तकनीकी और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने मौके पर जाकर स्थलीय निरीक्षण किया, तो जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच में पाया गया कि कई विकास कार्य या तो पूरी तरह अधूरे छोड़ दिए गए थे या फिर धरातल पर उनका कोई वजूद (अस्तित्व) ही नहीं था, जबकि फाइलों में उन्हें पूरा दिखाकर सरकारी खजाने से धनराशि की निकासी धड़ल्ले से कर ली गई थी।

विस्तृत जांच रिपोर्ट के मुताबिक, अकेले आरआरसी सेंटर के निर्माण के नाम पर सात लाख रुपये का फर्जी भुगतान किया गया था, जबकि अन्य विभिन्न निर्माण और विकास कार्यों में 8.55 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता पाई गई। कुल मिलाकर 15,55,785 रुपये के सरकारी धन के इस खुले दुरुपयोग की पुष्टि होने पर जिला प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधि को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था। तय समय सीमा के भीतर आरोपियों द्वारा दिया गया जवाब पूरी तरह असंतोषजनक और गोलमोल पाया गया, जिसके बाद जिलाधिकारी के आदेश पर सीधे कानूनी कार्रवाई (एफआईआर) का चाबुक चलाया गया। दर्ज मुकदमे के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़े में लगभग 13.52 लाख रुपये के अनियमित भुगतान के लिए तत्कालीन सचिव व ग्राम विकास अधिकारी मनोज कुमार को मुख्य रूप से दोषी पाया गया है, जबकि 2.03 लाख रुपये के गलत भुगतान के लिए तत्कालीन पंचायत सचिव उपेंद्र को जिम्मेदार ठहराया गया है। इसके साथ ही, सरकारी चेक पर संयुक्त हस्ताक्षर करने और इस पूरे गबन की साजिश में बराबर का भागीदार होने के चलते तत्कालीन ग्राम प्रधान अनंत देव सिंह यादव को भी मुकदमे में नामजद किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि विकास कार्यों में भ्रष्टाचार और सरकारी पैसे की बंदरबांट करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी।

AJEET KUMAR SINGH
Author: AJEET KUMAR SINGH

अजीत कुमार सिंह, नव हिंद समाचार (न्यूज़ एजेंसी) के उत्तर प्रदेश स्टेट हेड के रूप में कार्यरत्त हैं, जिनके पास पत्रकारिता का 3 साल का अनुभव है। अपनी तीव्र रिपोर्टिंग, रणनीतिक सोच और फील्ड वर्क में महारत के साथ, वह उत्तर प्रदेश में एजेंसी को प्रभावी ढंग से संभाल रहे हैं। अजीत जमीनी स्तर के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने और निष्पक्ष पत्रकारिता के माध्यम से समाज में बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow Us Now