HIGHLIGHTS
- मौत की दुकान बने अवैध अस्पताल: बिना रजिस्ट्रेशन और बिना डिग्री के ‘कंपाउंडर’ बने डॉक्टर, स्वास्थ्य विभाग की मेहरबानी से सील होने के बाद फिर खुल जाते हैं ताले
- बिना रजिस्ट्रेशन और बिना डिग्री के चल रहे अवैध अस्पताल, कंपाउंडर बने ‘सर्जन’
- सरकारी अस्पताल के बाहर दलालों का पहरा: सोनभद्र की गलियों में खुले मौत के कुएं, एक और प्रसूता की गई जान
- सील होने के बावजूद खुला था सोनभद्र का ग्लोबल हॉस्पिटल, डिलीवरी के बाद महिला की मौत पर डॉक्टर शव छोड़ हुआ फरार
हर्षवर्धन, सोनभद्र। जनपद में गली-कूचों से लेकर मुख्य बाजारों तक अवैध और मानक विहीन अस्पतालों व पैथोलॉजी सेंटरों की बाढ़ आ गई है। स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे चल रहे ये बिना रजिस्ट्रेशन वाले अस्पताल मासूम और गरीब जनता की जिंदगी के साथ सरेआम खिलवाड़ कर रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन कथित अस्पतालों में इलाज करने वाले तथाकथित डॉक्टरों के पास कोई वैध मेडिकल डिग्री तक नहीं है। किसी अन्य बड़े अस्पताल में कुछ समय तक कंपाउंडर, वार्ड बॉय या नर्स की नौकरी करने वाले लोग आज खुद को ‘सर्जन’ और ‘विशेषज्ञ’ घोषित कर अपने-अपने अस्पताल खोलकर बैठे हैं। आखिर इन बेलगाम अवैध अस्पतालों के संचालन का असली जिम्मेदार कौन है? स्थानीय जनता का सीधा आरोप है कि इस पूरे जानलेवा खेल में स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों का बड़ा हाथ है, क्योंकि विभाग द्वारा दिखावे के लिए अस्पताल सीज तो किए जाते हैं, लेकिन महज हफ्ते-पंद्रह दिन के भीतर रहस्यमयी तरीके से उनके ताले फिर खुल जाते हैं।
इस अवैध कारोबार का जाल इतना गहरा है कि महज एक-दो कमरों के भीतर पूरा का पूरा अस्पताल संचालित किया जा रहा है, जहां न तो वेंटिलेटर है, न ऑक्सीजन की सही व्यवस्था और न ही कोई आपातकालीन जीवन रक्षक प्रणाली। इन फर्जी अस्पतालों ने जिला अस्पताल के बाहर अपने दलालों और एजेंटों का एक पूरा नेटवर्क फैला रखा है। दूर-दराज के गांवों से जब कोई गरीब और लाचार मरीज सरकारी जिला अस्पताल में इलाज कराने आता है, तो ये दलाल उन्हें मुफ्त या सस्ते इलाज का झांसा देकर, बहला-फुसलाकर इन मौत के कुओं में धकेल देते हैं। हद तो यह है कि जिले में भ्रष्टाचार का ऐसा आलम है कि एक ही मेडिकल रजिस्ट्रेशन और डॉक्टर के नाम पर कई-कई अस्पतालों और पैथोलॉजी सेंटरों का धड़ल्ले से संचालन किया जा रहा है और विभागीय अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।
इस घोर प्रशासनिक लापरवाही का एक बेहद दर्दनाक और ताजा तरीन मामला दो दिन पहले कोन थाना क्षेत्र से सामने आया है। यहां स्थित ‘ग्लोबल हॉस्पिटल एंड सर्जिकल सेंटर’ में प्रसव (डिलीवरी) के बाद आशा नामक एक महिला की असमय मौत हो गई। मृतका के परिजनों का आरोप है कि प्रसव के दौरान कथित डॉक्टरों की घोर लापरवाही के कारण महिला की जान चली गई और जैसे ही इसकी भनक वहां मौजूद स्टाफ को लगी, तथाकथित मुख्य डॉक्टर महिला के शव को ऑपरेशन थिएटर (ओटी) में ही लावारिस छोड़कर मौके से फरार हो गया। हालांकि, गनीमत रही कि नवजात शिशु पूरी तरह सुरक्षित है। इस घटना के बाद जो सच सामने आया, वह स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर कालिख पोतने जैसा है। यह वही ‘ग्लोबल हॉस्पिटल’ है जिसे विभाग पहले भी दो बार गंभीर अनियमितताओं के कारण सील कर चुका था, लेकिन हर बार यह फिर से खुल गया। अगर स्वास्थ्य विभाग ने इस बेलगाम अस्पताल पर पहले ही सख्त और परमानेंट कानूनी कार्रवाई की होती, तो आज उस मासूम नवजात के सिर से मां का साया न उठता और उस महिला की जिंदगी बच सकती थी।
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। इस पूरे प्रकरण में गंभीर लापरवाही पाए जाने पर 108 एंबुलेंस के ईएमटी (Emergency Medical Technician) और चालक की भूमिका भी संदिग्ध मिली है, जिसके बाद दोनों की सेवा समाप्ति (बर्खास्तगी) के लिए संबंधित उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है। लेकिन स्थानीय प्रबुद्ध वर्ग और आम नागरिकों का कहना है कि एंबुलेंस कर्मियों पर कार्रवाई तो महज एक छोटा सा कदम है, असली कार्रवाई तो उन विभागीय अधिकारियों और फर्जी डॉक्टरों पर होनी चाहिए जो चंद रुपयों के लालच में इस खूनी खेल को संरक्षण दे रहे हैं। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि सोनभद्र की गलियों में चल रहे ऐसे सभी अवैध अस्पतालों और पैथोलॉजी सेंटरों का व्यापक स्तर पर सर्वे कराकर उन्हें हमेशा के लिए जमींदोज किया जाए और दोषियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज हो, ताकि भविष्य में किसी और ‘आशा’ को अपनी जान न गंवानी पड़े।
Author: Navhind Samachar
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