सोनभद्र में शिक्षा के बाजारीकरण और भ्रष्टाचार के खिलाफ अभाविप का हल्लाबोल: जिलाधिकारी को सौंपा 8 सूत्रीय मांग पत्र, बड़े आंदोलन की चेतावनी

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रॉबर्ट्सगंज (सोनभद्र)। जनपद में निजी स्कूलों द्वारा की जा रही मनमानी, भारी-भरकम फीस वसूली और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की कथित संलिप्तता के खिलाफ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने मोर्चा खोल दिया है। जिले में व्याप्त विभिन्न शैक्षिक अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के विरोध में अभाविप के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को जिलाधिकारी को एक विस्तृत 8 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। छात्र संगठन ने साफ तौर पर आरोप लगाया कि जिले के निजी स्कूल नियमों को ताक पर रखकर अभिभावकों का आर्थिक शोषण कर रहे हैं और जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं। अभाविप ने चेतावनी दी है कि यदि इन गंभीर समस्याओं पर जिला प्रशासन ने तत्काल सख्त और दंडात्मक कार्रवाई नहीं की, तो संगठन छात्र हित और आम जनमानस की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए एक वृहद और उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा।

जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में अभाविप ने निजी विद्यालयों द्वारा शिक्षा के बढ़ते बाजारीकरण पर गहरी चिंता जताई है। संगठन का आरोप है कि निजी स्कूल भारत सरकार के नियमों के विपरीत अभिभावकों पर अपने ही परिसर या चुनिंदा निर्धारित दुकानों से ऊंचे दामों पर किताबें और स्कूल ड्रेस खरीदने का अनुचित दबाव बना रहे हैं, जिसका कड़ाई से अनुपालन रोकते हुए दोषी स्कूलों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। इसके साथ ही, संविधान के अनुच्छेद 21A और राइट टू एजुकेशन (RTE) के तहत गरीब व वंचित बच्चों के लिए आरक्षित 25% निशुल्क सीटों के नियम की भी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। महंगे स्कूल इस नियम का पालन नहीं कर रहे हैं, इसलिए पात्र विद्यार्थियों की सूची को सार्वजनिक किया जाए और स्कूलों की दीवारों पर इस नियम को स्थाई रूप से लिखवाया जाए। अभाविप ने हर साल ली जाने वाली ‘री-एडमिशन फीस’ का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सीबीएसई, आईसीएसई और यूपी बोर्ड के स्कूल अगली कक्षा में जाते ही एकमुश्त मोटी प्रवेश फीस वसूलते हैं, जिस पर तुरंत रोक लगनी चाहिए और नए दाखिलों के लिए भी फीस का एक निश्चित मानक तय होना चाहिए।

निजी प्रकाशनों की किताबों के नाम पर हो रही लूट को उजागर करते हुए अभाविप ने बताया कि एलकेजी की किताबों का मूल्य 3000 से 4000 रुपये, कक्षा 1 से 5 तक के लिए 4500 से 6000 रुपये और कक्षा 6 से 8 तक के लिए 6000 से 7000 रुपये तक वसूला जा रहा है। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 के विपरीत एनसीईआरटी (NCERT) की सस्ती पुस्तकों के बजाय जानबूझकर निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें चलाई जा रही हैं, ऐसे स्कूलों को चिन्हित कर कार्रवाई की जानी चाहिए। इसके अलावा, एडमिशन के नाम पर 2000 से लेकर 18000 रुपये से अधिक और वार्षिक फीस के रूप में 15000 से 20000 रुपये तक की अवैध वसूली हो रही है, जिसे रोकने के लिए शुल्क निर्धारण नीति बने और स्कूलों से इस बाबत कानूनी शपथ पत्र लिया जाए। अभाविप ने बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग की नाक के नीचे चल रहे बिना मान्यता और बिना मानक वाले अवैध स्कूलों की जांच कर उन्हें बंद करने तथा अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) कॉलेजों में कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों से की जा रही अवैध वसूली पर भी तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

इस महत्वपूर्ण ज्ञापन प्रदर्शन के दौरान अभाविप के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य मनमोहन निषाद, विभाग संयोजक सौरभ सिंह, प्रांत संयोजक अनमोल सोनी और जिला संयोजक ललितेश मिश्र ने संयुक्त रूप से कहा कि शिक्षा को व्यापार बनाने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी। इस मौके पर प्रांत सह संयोजक (SFS) राहुल जलान, प्रांत सह संयोजक (खेलो भारत) मृगांक दुबे, राज सिंह, अभय सिंह, आशुतोष मोदनवाल, विश्वजीत, सिद्धार्थ, हर्ष, सक्षम, शिवम, नीतीश सहित संगठन के दर्जनों प्रमुख कार्यकर्ता और छात्र नेता उपस्थित रहे।

AJEET KUMAR SINGH
Author: AJEET KUMAR SINGH

अजीत कुमार सिंह, नव हिंद समाचार (न्यूज़ एजेंसी) के उत्तर प्रदेश स्टेट हेड के रूप में कार्यरत्त हैं, जिनके पास पत्रकारिता का 2 साल का अनुभव है। अपनी तीव्र रिपोर्टिंग, रणनीतिक सोच और फील्ड वर्क में महारत के साथ, वह उत्तर प्रदेश में एजेंसी को प्रभावी ढंग से संभाल रहे हैं। अजीत जमीनी स्तर के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने और निष्पक्ष पत्रकारिता के माध्यम से समाज में बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"

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