वाराणसी: कैंट रोडवेज से लेकर इंग्लिशिया लाइन और कमलापति तिराहे तक महज 100 मीटर के दायरे में 60 ऑटो खड़े होकर खुलेआम सवारियां भरते नजर आए। जबकि यहां एक साल में पांच बड़े अभियान चलाए गए।
महीने में दो बार चेकिंग होती है। इसके बाद भी इंग्लिशिया लाइन तिराहे से पंडित कमलापति त्रिपाठी तिराहे पर अतिक्रमण है। खुद पुलिस कमिश्नर कई बार चेकिंग कर चुके हैं। 10 कदम पर पुलिस बूथ है। 15 कदम पर पुलिस वाले रहते हैं। 20 कदम पर ऑटो वाले सवारी बिठाते हैं।
परिवहन विभाग की ओर से यह स्पष्ट है कि किस रूट पर कितने ऑटो और ई-रिक्शा चलेंगे, इसकी सीमा तय है। बावजूद परमिटधारी चालकों ने रोडवेज कैंट, इंग्लिशिया लाइन और कमलापति तिराहा को स्थायी स्टैंड में बदल दिया है। हालत यह है कि बसें गेट तक नहीं पहुंच पातीं, सड़क पर कतार लग जाती है और जाम कई बार आधे से एक किलोमीटर तक हो जाता है। फाइलों में चालान, वाहन सीज और हटाने की कार्रवाई है, लेकिन मौके पर कुछ और ही है।
जनता के सवाल : जब रूट, संख्या और स्टैंड तय है, तो फिर कैंट रोडवेज पर यह अराजकता क्यों? क्या कार्रवाई सिर्फ दिखावटी अभियानों तक सीमित है या फिर किसी स्थायी ट्रैफिक प्लान और सख्त निगरानी की जरूरत है।
एक दिन में किया 1.28 लाख रुपये का चालान
कमिश्नरेट पुलिस ने एक ही दिन में 1.28 लाख रुपये का चालान किया। 31 वाहनों को सीज कर 6.46 लाख रुपये शमन शुल्क वसूला। तीनों जोन की बात करें तो काशी जोन ने 761 वाहन चेक किए, बिना लाइसेंस के 79 मिले जबकि बिना पंजीकरण के 471, वरुणा जोन ने 345 चेक किया। जिसमें बिना लाइसेंस 49 और बिना लाइसेंस 10 मिले।
गोमती जोन ने 614 ऑटो व ई रिक्शा चेक किया जिसमें बिना लाइसेंस 200 और बिना पंजीकरण 56 वाहन मिले। जबकि यातायात विभाग की कार्रवाई में 789 वाहनों को चेक किया गया। जिसमें 7 बिना लाइसेंस के और बिना पंजीकरण के 19 वाहन मिले।
कैंट रोडवेज परिसर और बाहर अवैध तरीके से ऑटो में सवारी बिठाने की सूचना मिली है। इस मामले में कार्रवाई की जाएगी। परिसर के बाहर ऑटो को खड़ा नहीं होने दिया जाएगा। – अंशुमान मिश्रा, एडीसीपी ट्रैफिक।
Author: Vinod Garg
2 years experience in the field of journalism.




