Sonbhadra News : ऑफलाइन चिकित्सा बिल जमा करने की व्यवस्था बहाल करने की माँग को लेकर पेंशनर्स ने किया प्रदर्शन

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आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । उम्र के आखिरी पड़ाव पर इलाज के लिए सरकारी चिकित्सा प्रतिपूर्ति के सहारे रहने वाले पेंशनरों की मुश्किलें ऑनलाइन व्यवस्था ने और बढ़ा दी हैं। चिकित्सा प्रतिपूर्ति के बिल ऑफलाइन जमा करने की सुविधा बंद किए जाने से बुजुर्ग पेंशनर परेशान हैं। किसी का इलाज प्रभावित हो रहा है तो किसी का चिकित्सा बिल भुगतान की प्रक्रिया में फंसकर कालातीत होने की कगार पर पहुंच गया है। इस समस्या को लेकर सोमवार को सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर्स एसोसिएशन के बैनर तले पेंशनरों ने जोरदार धरना-प्रदर्शन किया और सरकार से ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन माध्यम से भी चिकित्सा बिल स्वीकार करने की मांग उठाई।

 

प्रदर्शन के दौरान पेंशनरों ने कहा कि शासन की ओर से 9 सितंबर 2026 को जारी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के शासनादेश के बाद सेवानिवृत्त कर्मचारियों के सामने गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। चिकित्सा प्रतिपूर्ति के दावे ऑनलाइन जमा करने की व्यवस्था लागू कर दी गई है, जबकि बड़ी संख्या में पेंशनर कंप्यूटर और ऑनलाइन प्रक्रिया से परिचित नहीं हैं। इतना ही नहीं, तकनीकी व्यवस्था भी पूरी तरह तैयार नहीं है। कार्यरत कर्मचारियों के ईएचआरएमएस कोड पोर्टल पर उपलब्ध हैं, लेकिन बड़ी संख्या में पुराने पेंशनरों का डाटा और कोड ऑनलाइन दर्ज नहीं है।

पेंशनर सलाहकार समिति में उठा था मुद्दा, फिर भी बंद कर दी ऑफलाइन व्यवस्था –

प्रदर्शन कर रहे पेंशनर्स ने बताया कि गत 28 सितंबर को अध्यक्ष पेंशनर्स सलाहकार समिति एवं अपर मुख्य सचिव, वित्त विभाग, उत्तर प्रदेश शासन की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था। संगठन ने 26 सितंबर को लिखित पत्र देकर मांग की थी कि पेंशनरों को पहले की तरह ऑफलाइन चिकित्सा बिल जमा करने का विकल्प दिया जाए। इस पर समिति के अध्यक्ष ने समस्या को गंभीर बताते हुए आवश्यकता पड़ने पर बैठक बुलाने का आश्वासन दिया था।

इसके बावजूद चिकित्सा विभाग ने एक अक्टूबर से ऑफलाइन बिल स्वीकार करना बंद कर दिया। संगठन का कहना है कि पेंशनर्स सलाहकार समिति की बैठक का कार्यवृत्त तक जारी नहीं हुआ और उससे पहले ही ऑफलाइन व्यवस्था बंद कर दी गई। इससे बुजुर्ग पेंशनरों के सामने इलाज और चिकित्सा खर्च की प्रतिपूर्ति को लेकर संकट खड़ा हो गया है।

60 प्रतिशत पेंशनर ऑनलाइन जमा कर रहे जीवन प्रमाण पत्र –

पेंशनरों ने तर्क दिया कि ऑनलाइन व्यवस्था को धीरे-धीरे प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, न कि ऑफलाइन विकल्प अचानक समाप्त कर बुजुर्गों को परेशानी में डाला जाए। संगठन ने उदाहरण देते हुए बताया कि पहले ऑनलाइन जीवन प्रमाण पत्र जमा करने वाले पेंशनरों की संख्या बेहद कम थी, लेकिन अब लगभग 60 प्रतिशत पेंशनर इस सुविधा का उपयोग कर रहे हैं। इसी तरह चिकित्सा बिलों में भी जैसे-जैसे पेंशनर ऑनलाइन प्रक्रिया से परिचित होते जाएंगे, ऑफलाइन बिल जमा करने की संख्या स्वतः कम होती जाएगी।

मांग नहीं मानी तो विधानसभा के सामने होगा बड़ा आंदोलन –

पेंशनर्स ने बताया कि इस समस्या के समाधान के लिए 12 अक्टूबर को भी शासन को पत्र भेजा गया था, लेकिन कोई ठोस पहल नहीं हुई। इसी के विरोध में दो नवंबर को प्रदेश के सभी जनपदों में धरना-प्रदर्शन, रैली और आमसभा के माध्यम से ज्ञापन देने का निर्णय लिया गया था।

धरना-प्रदर्शन के दौरान प्रस्ताव पारित कर चेतावनी दी गई कि यदि सरकार ऑफलाइन चिकित्सा बिल स्वीकार करने की व्यवस्था बहाल नहीं करती है तो प्रांतीय संगठन विधानसभा के समक्ष विशाल प्रदर्शन की घोषणा करेगा। इसमें प्रदेशभर से हजारों पेंशनर शामिल होंगे।

पेंशनरों ने सरकार से मांग की कि ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिल जमा करने का विकल्प तत्काल बहाल किया जाए, ताकि तकनीकी जानकारी के अभाव में किसी बुजुर्ग को इलाज और उसके खर्च की प्रतिपूर्ति से वंचित न होना पड़े।

इस दौरान सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अवधेश सिंह, मंत्री रामराज राम सहित बड़ी संख्या में पेंशनर्स मौजूद रहे।

Anand Kumar Chaubey
Author: Anand Kumar Chaubey

9 years experience in Journalism....

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