आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । नगर के ऐतिहासिक श्री रामलीला मैदान में आयोजित 125वें वर्ष की पारंपरिक रामलीला के दूसरे दिन का मंचन बेहद उत्साह और भक्तिमय माहौल में संपन्न हुआ। ‘आदर्श श्री रामलीला मंडल पिपलेश्वर धाम (सिंगरौली)’ के कुशल कलाकारों ने मंच पर रावण जन्म और राक्षस अत्याचार की लीला का सजीव चित्रण किया, जिसके बाद भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव की लीला ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लीला के प्रथम चरण में दिखाया गया कि लंका में रावण, कुंभकर्ण और विभीषण का जन्म होता है और तीनों घोर तपस्या कर ब्रह्मा, विष्णु व महेश से वरदान प्राप्त करते हैं। इस दौरान कुंभकर्ण की आसुरी प्रवृत्ति को भांपते हुए भगवान की प्रेरणा से मां सरस्वती उसकी बुद्धि विचलित कर देती हैं, जिसके परिणामस्वरूप वह इंद्रासन की जगह निद्रासन मांग बैठता है। रावण के दुखी होने पर भगवान द्वारा उसे छह माह में एक दिन जागने का वरदान मिलने का प्रसंग भी बहुत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
रावण जन्म की कथा के उपरांत जब मंच पर चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ और माता कौशल्या के यहाँ पुत्र प्राप्ति हेतु यज्ञ अनुष्ठान और तदन्तर श्री राम, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न चारों भाइयों के प्राकट्य की लीला का मंचन शुरू हुआ, तो पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठा। नारायण के चतुर्भुज रूप में अवतरण और बाल रूप के दर्शन होते ही उपस्थित दर्शकों ने नृत्य और गीतों के साथ अपनी खुशियां मनाईं। इस दौरान ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष के बीच भव्य आतिशबाजी की गई और बच्चों व श्रद्धालुओं में खिलौने तथा मिष्ठान्न का वितरण किया गया। तत्पश्चात बाल स्वरूपों के नामकरण संस्कार की सुंदर झांकी प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना के साथ हुई थी। लीला के मुख्य आकर्षण के बीच समिति के संरक्षक जितेंद्र सिंह, अध्यक्ष पवन कुमार जैन और कोषाध्यक्ष राकेश कुमार गुप्ता ने संयुक्त रूप से प्रभु की आरती उतारी।
इस अवसर पर आनंद मिश्रा, प्रमोद गुप्ता, भरत मिलाप समिति के संयोजक चंदन केसरी, रविंद्र केसरी, चंद्र कुमार केजरीवाल और सुशील पाठक सहित समिति के तमाम पदाधिकारी व बड़ी संख्या में नगरवासी उपस्थित रहे।
Author: Anand Kumar Chaubey
9 years experience in Journalism....





