उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की कमी को दूर करने और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए योगी सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रदेश में जल्द ही ‘उत्तर प्रदेश विशेषज्ञ चिकित्सक एवं चिकित्सा शिक्षक भर्ती बोर्ड’ का गठन किया जाएगा। यह नया बोर्ड न केवल विशेषज्ञ चिकित्सकों और चिकित्सा शिक्षकों की सीधी भर्ती करेगा, बल्कि लेवल-1 के एमबीबीएस डिग्रीधारी चिकित्सकों की लेवल-2 के पदों पर पदोन्नति (प्रमोशन) की प्रक्रिया को भी तेजी से पूरा करेगा। इस नई व्यवस्था को अमलीजामा पहनाने के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा नियमावली 2020 में जरूरी संशोधन किए जाएंगे। इस संबंध में शासन की ओर से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. पवन कुमार अरुण को पत्र भेजकर नियमावली में बदलाव से जुड़ी पत्रावलियां तैयार करने और परीक्षण के बाद जल्द से जल्द प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
दरअसल, मौजूदा समय में उत्तर प्रदेश के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों के करीब छह हजार पद खाली पड़े हैं, वहीं मेडिकल कॉलेजों में भी संकाय सदस्यों (फैकल्टी) के 30 से 40 फीसदी पद रिक्त हैं। इन पदों को लोक सेवा आयोग के माध्यम से भरने में काफी लंबा वक्त लग जाता है, जिससे मरीजों को समय पर बेहतर इलाज मिलने में दिक्कत होती है। इसी समस्या का स्थाई समाधान निकालते हुए सरकार ने इस विशेष भर्ती बोर्ड को गठित करने का फैसला लिया है। यह बोर्ड सीधे तौर पर लेवल-2 यानी एमडी-एमएस डिग्रीधारी विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को पूरा करेगा और साथ ही सालों से पदोन्नति का इंतजार कर रहे एमबीबीएस डॉक्टरों के प्रमोशन का रास्ता भी साफ करेगा, जिससे चिकित्सा क्षेत्र में कार्यकुशलता बढ़ेगी।
गठन के ब्लूप्रिंट के अनुसार, इस नए भर्ती बोर्ड का स्वरूप बेहद सुदृढ़ होगा, जिसमें एक अध्यक्ष सहित कुल छह सदस्य शामिल होंगे। बोर्ड के अध्यक्ष का मनोनयन सीधे मुख्यमंत्री द्वारा किया जाएगा, जो केजीएमयू के वर्तमान या पूर्व कुलपति, एसजीपीजीआई के वर्तमान या पूर्व निदेशक, अथवा चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत या सेवानिवृत्त अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी हो सकते हैं। इसके अलावा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के निदेशक (प्रशासन) इस बोर्ड के सचिव की जिम्मेदारी संभालेंगे। बोर्ड में चिकित्सा व चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में कम से कम 25 वर्ष का लंबा अनुभव रखने वाले विशेषज्ञों के साथ-साथ अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्ग के विशेष सचिव स्तर के अधिकारियों को भी सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा।
बोर्ड के सुचारू संचालन के लिए कुल 40 अधिकारी और कर्मचारी तैनात किए जाएंगे। प्रशासनिक और तकनीकी कार्यों को गति देने के लिए एक विधि अधिकारी, एक सिस्टम एनालिस्ट, चार डेटा एंट्री ऑपरेटर और 10 अनुसेवक आउटसोर्सिंग के माध्यम से रखे जाएंगे। इसके अतिरिक्त, परीक्षा नियंत्रक, वित्त अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, वैयक्तिक सहायक, प्रधान सहायक, वरिष्ठ सहायक और कनिष्ठ सहायक जैसे महत्वपूर्ण पद चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय से प्रतिनियुक्ति (डेप्युटेशन) के आधार पर भरे जाएंगे। सरकार की इस पहल से जहां चिकित्सा क्षेत्र में युवाओं के लिए रोजगार और प्रमोशन के नए दरवाजे खुलेंगे, वहीं प्रदेश की आम जनता को भी विशेषज्ञ डॉक्टरों का इलाज बेहद आसानी और तेजी से मिल सकेगा।
Author: AJEET KUMAR SINGH
अजीत कुमार सिंह, नव हिंद समाचार (न्यूज़ एजेंसी) के उत्तर प्रदेश स्टेट हेड के रूप में कार्यरत्त हैं, जिनके पास पत्रकारिता का 2 साल का अनुभव है। अपनी तीव्र रिपोर्टिंग, रणनीतिक सोच और फील्ड वर्क में महारत के साथ, वह उत्तर प्रदेश में एजेंसी को प्रभावी ढंग से संभाल रहे हैं। अजीत जमीनी स्तर के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने और निष्पक्ष पत्रकारिता के माध्यम से समाज में बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"





