मीरजापुर में महिलाओं की आर्थिक आजादी का जरिया बनीं गौशालाएं, निराश्रित गोवंश के गोबर से तैयार हो रही रिकॉर्ड वर्मी कंपोस्ट खाद

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मीरजापुर। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा निराश्रित गोवंश को संरक्षण देने के लिए शुरू किए गए आश्रय स्थल अब ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वावलंबन और अतिरिक्त आमदनी का एक बड़ा जरिया बनने लगे हैं। जिले के 49 गोवंश आश्रय स्थलों में हजारों की संख्या में गोवंश को संरक्षित करने के बाद जिला प्रशासन ने एक नई और पर्यावरण अनुकूल पहल की है। इसके तहत जिले के प्रत्येक विकासखंड में एक-एक गोवंश आश्रय स्थल का चयन किया गया है, जहाँ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं गौशालाओं से निकलने वाले गोबर का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर वर्मी कंपोस्ट (केंचुआ खाद) तैयार कर रही हैं। इस अनूठी मुहिम से जहाँ एक तरफ जिले में रसायनों से मुक्त जैविक खेती को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण आंचल की महिलाएं भी आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर हो रही हैं।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के उपायुक्त (स्वतः रोजगार) रमाशंकर सिंह ने इस परियोजना के तकनीकी पहलुओं की जानकारी देते हुए बताया कि जिले के 12 विकासखंडों में चुनिंदा गौशालाओं को इस काम के लिए चिन्हित किया गया था। इन केंद्रों पर समूह की महिलाएं रोजाना गौशालाओं से गोबर एकत्र करती हैं और उसे एक बड़े वैज्ञानिक ढंग से तैयार गड्ढे में डालकर सुबह-शाम पानी से सिंचित करती हैं। गोबर का तापमान संतुलित होने के बाद उसमें विशेष प्रजाति के केंचुए डाले जाते हैं, जो प्राकृतिक और बेहद उच्च गुणवत्ता वाली खाद तैयार करते हैं। इस पूरी प्रक्रिया के तहत वर्मी कंपोस्ट को पूरी तरह तैयार होने में 45 से 60 दिन का समय लगता है। इसी साल मार्च महीने से शुरू की गईं इन वर्मी कंपोस्ट यूनिटों के परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे हैं और महिलाओं ने अपनी कड़ी मेहनत से अब तक कुल 5751 किलोग्राम वर्मी कंपोस्ट का उत्पादन कर लिया है।

इस मुहिम की सबसे खास बात यह है कि इस जैविक खाद को बढ़ावा देने के लिए एक मजबूत बाजार व्यवस्था भी तैयार की गई है। क्षेत्र के प्रगतिशील किसान इन वर्मी कंपोस्ट यूनिटों पर जाकर सीधे महिलाओं से इस खाद को खरीद सकते हैं। इसके अलावा स्वयं सहायता समूह की महिलाएं इस तैयार जैविक खाद को वन विभाग, उद्यान विभाग और स्थानीय किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को 10 रुपये प्रति किलोग्राम के तय भाव पर बेच रही हैं। महज कुछ ही महीनों के भीतर गौशालाओं के गोबर से तैयार इस वर्मी कंपोस्ट को बेचकर समूह की महिलाओं को 35,888 रुपये की शुद्ध आमदनी हो चुकी है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, अब तक सबसे बेहतरीन प्रदर्शन छानबे विकासखंड के अंतर्गत विजयपुर में संचालित वर्मी कंपोस्ट यूनिट का रहा है, जहाँ महिलाओं ने अकेले 3100 किलो वर्मी कंपोस्ट तैयार कर एक मिसाल पेश की है। कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि वर्मी कंपोस्ट मिट्टी की घटती उर्वरता को कई गुना बढ़ाती है और रसायनों के दुष्प्रभावों को कम कर जैविक खेती को अपनाने के लिए किसानों के लिए एक बेहतरीन और सस्ता विकल्प साबित हो रही है।

AJEET KUMAR SINGH
Author: AJEET KUMAR SINGH

अजीत कुमार सिंह, नव हिंद समाचार (न्यूज़ एजेंसी) के उत्तर प्रदेश स्टेट हेड के रूप में कार्यरत्त हैं, जिनके पास पत्रकारिता का 2 साल का अनुभव है। अपनी तीव्र रिपोर्टिंग, रणनीतिक सोच और फील्ड वर्क में महारत के साथ, वह उत्तर प्रदेश में एजेंसी को प्रभावी ढंग से संभाल रहे हैं। अजीत जमीनी स्तर के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने और निष्पक्ष पत्रकारिता के माध्यम से समाज में बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"

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