वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दो दिवसीय काशी प्रवास के दौरान श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थापित उज्जैन के महाकाल मंदिर से आई 740 किलोग्राम की विशालकाय ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने कमिश्नर एस राजलिंगम से घड़ी की कार्यप्रणाली पर विस्तार से चर्चा की और एक महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि यद्यपि यह घड़ी विक्रम संवत के आधार पर समय बताती है, किंतु हमारी वैदिक परंपरा हजारों वर्ष पुरानी है, इसलिए इसमें और भी प्राचीन कालखंडों की सूक्ष्म गणनाओं को जोड़ा जाना चाहिए। कमिश्नर ने प्रधानमंत्री को आश्वस्त किया कि उनके सुझाव पर विशेषज्ञों के माध्यम से जल्द ही काम शुरू किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि यह घड़ी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेंट की थी, जो पंचांग, ग्रहों की स्थिति और भारतीय स्टैंडर्ड टाइम जैसे कई महत्वपूर्ण विवरण प्रदर्शित करती है।
बाबा विश्वनाथ के दर्शन-पूजन के बाद प्रधानमंत्री को काशी के विशिष्ट हुनर का प्रतीक आठ जीआई उत्पादों का उपहार भी मिला। स्थानीय मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों ने उन्हें गुलाबी मीनाकारी से निर्मित विश्वनाथ मंदिर की प्रतिकृति, त्रिशूल और डमरू भेंट किया, जिसे हस्तशिल्पी कुंज बिहारी ने विशेष रूप से एक सप्ताह की मेहनत से तैयार किया था। इसके अतिरिक्त, बरेका की जनसभा में महिलाओं द्वारा छह अन्य जीआई उत्पाद भी उन्हें सौंपे गए। अपने दौरे के दूसरे दिन प्रधानमंत्री की दिनचर्या भी चर्चा में रही; उन्होंने सुबह 5:20 बजे उठकर योग और प्राणायाम किया और नाश्ते में पोहा, मूंग की खिचड़ी, ढोकला और फल जैसे सात्विक आहार ग्रहण किए। सादगी और धार्मिक निष्ठा के संगम वाले इस दौरे ने जहाँ स्थानीय शिल्पियों का मनोबल बढ़ाया, वहीं काशी की परंपराओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का नया मार्ग भी प्रशस्त किया।
Author: AJEET KUMAR SINGH
अजीत कुमार सिंह, नव हिंद समाचार (न्यूज़ एजेंसी) के उत्तर प्रदेश स्टेट हेड के रूप में कार्यरत्त हैं, जिनके पास पत्रकारिता का 2 साल का अनुभव है। अपनी तीव्र रिपोर्टिंग, रणनीतिक सोच और फील्ड वर्क में महारत के साथ, वह उत्तर प्रदेश में एजेंसी को प्रभावी ढंग से संभाल रहे हैं। अजीत जमीनी स्तर के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने और निष्पक्ष पत्रकारिता के माध्यम से समाज में बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"




