वाराणसी | उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में वित्तीय समावेशन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। मार्च 2026 की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वाराणसी, गाजीपुर, आजमगढ़ और जौनपुर समेत पूर्वांचल के 10 प्रमुख जिलों में जन-धन खातों की संख्या 3 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई है। इन खातों में वर्तमान में 18,000 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि जमा है।
प्रमुख आंकड़े एक नजर में:
- कुल खाते (पूर्वांचल के 10 जिले) 3 करोड़
- कुल जमा राशि ₹18,000 करोड़
- महिलाओं की हिस्सेदारी 56%
- ग्रामीण क्षेत्रों में खाते: 80%
- जीरो बैलेंस वाले खाते: 18 लाख (6%)
आधी आबादी का बढ़ा भरोसा
रिपोर्ट के सबसे उत्साहजनक पहलुओं में से एक महिलाओं की भागीदारी है। कुल खातों में से 56 फीसदी खाते महिलाओं के हैं, जो ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की ओर इशारा करते हैं। साथ ही, कुल खातों का 80 फीसदी हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों से आता है, जिससे स्पष्ट है कि बैंकिंग सेवाएं अब गांव-गांव तक अपनी जड़ें जमा चुकी हैं।
जीरो बैलेंस खातों की चुनौती
हालांकि आंकड़ों का एक दूसरा पहलू भी है। पूर्वांचल में करीब 18 लाख खाते (6%)ऐसे हैं जिनमें एक भी रुपया जमा नहीं है।
मेंटेनेंस का खर्च: कचहरी स्थित एसबीआई के मैनेजर वेद प्रकाश शर्मा के अनुसार, एक शून्य बैलेंस खाते को मेंटेन करने पर सालाना ₹3500 से ₹5000 का खर्च आता है।
आर्थिक बोझ: इस आधार पर देखें तो केवल इन 18 लाख जीरो बैलेंस खातों के रखरखाव पर बैंकों को सालाना **6.3 अरब से 9 अरब रुपये** तक खर्च करने पड़ रहे हैं।
क्षेत्रीय असमानता
आंकड़ों विश्लेषण से पता चलता है कि वाराणसी, प्रयागराज और गोरखपुर जैसे शहरी प्रधान जिलों में जीरो बैलेंस खातों की संख्या काफी कम है। इसके विपरीत, आजमगढ़, मऊ और बलिया जैसे ग्रामीण प्रधान जिलों में ऐसे खातों की संख्या **10 से 12 फीसदी** तक है।
उत्तर प्रदेश का परिदृश्य: पूरे प्रदेश की बात करें तो यूपी में जन-धन खातों की कुल संख्या 10.30 करोड़ के पार पहुंच गई है, जिनमें कुल ₹63,495 करोड़ जमा हैं। प्रदेश स्तर पर अब केवल 8-10% खाते ही जीरो बैलेंस की श्रेणी में बचे हैं।
Author: Vinod Garg
2 years experience in the field of journalism.



