- 12-12 हजार रूपये अर्थदंड, न देने पर 3-3 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी
- जेल में बितायी अवधि सजा में समाहित की जाएगी
- साढ़े तीन वर्ष पूर्व हुए रामसेवक उर्फ काशी हत्याकांड का मामला
सोनभद्र। साढ़े तीन वर्ष पूर्व हुए रामसेवक उर्फ काशी हत्याकांड के मामले में मंगलवार को सुनवाई करते हुए सत्र न्यायाधीश राम सुलीन सिंह की अदालत ने दोषसिद्ध पाकर दोषी दंपती को 10-10 वर्ष का कारावास व 12-12 हजार रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर 3-3 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। जेल में बिताई अवधि सजा में समाहित की जाएगी।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक विजय कुमार पुत्र बनवारी कोल निवासी अरुआंव, थाना शाहगंज, जिला सोनभद्र ने घोरावल थाने में दी तहरीर में अवगत कराया था कि उसका लड़का रामसेवक उर्फ काशी उम्र 26 वर्ष 9 अगस्त 2022 को शाम करीब 4 बजे घर से बाइक से निकला था । उसके साथ खड़िया निवासी मुकेश भी था । लड़का शाम को घर नहीं आया। दूसरे दिन भी काफी खोजबीन किया, लेकिन उसका पता नहीं चला । 12 अगस्त को गांव के लोगों द्वारा मोबाइल में फोटो दिखाकर बताया कि 10 अगस्त को महुआव पांडेय गांव के कुएं में एक युवक की लाश मिली है। जिसे पोस्टमार्टम हाउस में रखा गया है। जब पोस्टमार्टम हाउस जाकर देखा तो बेटे की लाश थी। पोस्टमार्टम के बाद शव का अंतिम संस्कार किया गया। उसके बाद पता किया तो जानकारी मिली कि रामलखन उर्फ रवि उर्फ बाठे पुत्र पुदीन चमार निवासी महुआंव पांडेय, थाना घोरावल, जिला सोनभद्र के घर उसका लड़का 9 अगस्त की शाम गया था। जहां पर शराब पीकर आपस मे कहासुनी हुई थी। इसी दौरान मारपीट कर हत्या करने के बाद शव को छुपाने के लिए कुएं में फेंक दिया गया था। इस तहरीर पर पुलिस ने रामलखन समेत दो लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू कर दिया। विवेचक ने पर्याप्त सबूत मिलने पर दंपती के विरुद्ध न्यायालय में चार्जशीट दाखिल किया था।
मामले की सुनवाई के दौरान जहां अभियुक्तगणों के अधिवक्ता ने पहला अपराध बताते हुए कम से कम दंड दिए जाने की याचना की, वहीं जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी ज्ञानेंद्र शरण रॉय ने हत्या का मामला बताते हुए अधिक से अधिक दंड देने की याचना की। अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, गवाहों के बयान व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद दोषसिद्ध पाकर दोषी दंपती रामलखन व कृष्णावती को 10-10 वर्ष का कारावास व 12-12 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर 3-3 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। जेल में बिताई अवधि सजा में समाहित की जाएगी।
Author: Vinod Garg
2 years experience in the field of journalism.





